आखिरकार कौन है मुंगेली तहसील के कामकाज में रोड़ा डालने वाला? किसके इशारे पर अभी भी हो रही कार्यवाही और कामकाज प्रभावित

मुंगेली। मुंगेली तहसील कार्यालय के मनहूसियत भरे 28 माह टलने के बावजूद अभी भी कौन है जो तहसील के काम को नियंत्रित कर रहा है? किसके इशारे पर एक पटवारी को कभी प्रभार तो कभी अचानक ट्रेक रिपोर्ट के आधार पर निलंबित कर दिया जाता है। क्या और पटवारियों के ट्रेक रिपोर्ट कभी देखे गए? इन सबसे तो यही कयास लगाये जा रहे है कि पूर्व में पदस्थ रहे अधिकारियों का ट्रांसफर के बावजूद मुंगेली जिले में हस्तक्षेप और अपनी दुकानदारी बनाये रखने का मोह भंग नही हो रहा है। जिसके चलते पटवारी लोगो को टारगेट कर अपना अभी भी मुंगेली जिले में वजूद बनाये रहने का एहसास कराया जा रहा है। ऐसे में अब पटवारी लामबंद होते नजर आ रहे है कभी भी ऐसे कार्यवाही के चलते भयानक आंदोलन अथवा हड़ताल के मूड में आ सकते हैं।

मंत्रियों, नेताओ को रिश्तेदार बता चलाई जाती रही अपनी दुकानदारी

बता दें मुंगेली जिले में पदस्थ रहे एक अधिकारी ने अपने पूरे कार्यकाल सत्तापक्ष से जुड़े लोगों को अपने रिश्तेदार होने के हवाले अथवा किसी मंत्री को अपना मित्र, रिश्तेदार बता बहुत उल्लु सीधा किया जाता रहा। अपने मूल कर्तव्यों के लिए कभी वफादार न रहना बार बार किसी बहाने मुख्यालय से बाहर रहने इनकी खासियत रही उसके बावजूद जब ऐसे काले कारनामे वाले अधिकारी को जिले से अब बाहर कर दिया गया है तब भी बड़े पद में वापस आने का भय फैलाते रहते है मातहत लोगो से कोई भी कार्यवाही कराने की जुगत में लगे हुए है।

इनके कार्यकाल में आज भी लोग अपने सामान्य,सीधे,सरल कामो के लिए खून के आंसू रोते दिखे है। जिनसे मोटा चढ़ावा मिला उनका काम रातोरात हुआ अन्यथा 28 महीने भटकते रहे कुछ ने तो दहशतगर्दी में अपना जीवन भी खो दिया मगर अब भी उस अधिकारी को मुंगेली में रायता फैलाने कोई कसर नही छोड़ी जा रही है। बावजूद जिले के प्रशासनिक जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने नजर आ रहे हैं।

विवादों से रहा है बहुत पुराना नाता,हाई कोर्ट में पहले भी और आगे भी लग रहे याचिका

बता दे समय पूर्व पदोन्नति, अनर्गल ढंग से पदस्थापना, शासकीय कामकाज में अपने ही बैच के लोगो के हक छीनने जैसे बहुत से कुत्सित प्रयास संबंधित अधिकारी द्वारा किया जाता रहा जिसके चलते पूर्व में भी उक्त अधिकारी के विरुद्ध अधीनस्थ लोगो द्वारा हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई अब मुंगेली के कुछ लोग भले ही उक्त अधिकारी का जिला से निकाल बाहर होने के बावजूद पुराने कर्मकाण्ड व उनकी पदोन्नति को चुनौती देकर याचिका लगाई जा रही है।

तहसील में है अभी भी सभी कामो में कोटवार, कच्चे लोगो का दखल

आपको जानकर बड़ी हैरानी हो सकती है कि मुंगेली तहसील में समस्त कोर्ट के न्यायालयिन काम के अलावा पूरा तहसील के काम कच्चे के लोगो अथवा कोटवारों के जिम्मे है जिनके पास न्यायलयीन कार्यो का न अनुभव है न ही उस कुर्सी में बैठने के पात्रता धारी मगर ये दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाय कि हिटलर की बनाई व्यवस्था जैसे आज मुंगेली तहसील में एकदो कर्मचारियों के अलावा सभी लोग या तो कोटवार है या कच्चे के बाहरी लोगो से काम कराया जा रहा है। ऐसे में इनका रुतबा मानो किसी हिटलर से कम नही रहता बिना पैसों के ये लोग कोई काम नही करते कारण कोई कार्यवाही कर भी दे तो इनका क्या बिगड़ना है जब ये उस कार्यालय के रिकार्डेड कर्मचारी है ही नही।

नई कर्मचारियों के लिए नही की जाती मांग

जानकारी के मुताबिक मुंगेली तहसील में पदस्थ कर्मचारियों के स्थानांतरण अथवा सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त हुए पदों के लिए कभी कोई व्यवस्था नही की जाती रही हैं जिसके बाद पूर्व में पदस्थ अधिकारी अपने जरूरत के अनुसार अपने हेल्पर,खानसामों अथवा कोटवारों को महत्वपूर्ण पदों में बिठा बिहार की तर्ज पर काम कराया जाता रहा आज अधिकारी नए है मगर अधीनस्थ वही कोटवारी व्यवस्था रहने से लोग आज भी हलाकान, परेशान है।

नए जिम्मेदार तहसील के अधिकारियों को बदलनी होगी पूरी व्यवस्था

बता दे बहुत हद तक तहसील में अधिकारियों के स्थानांतरण बाद नेतृत्व बदल चुका है मगर जब तक आधारभूत सरंचना(अधीनस्थ कर्मचारियों) की नही बदली जाएगी तब तक मानो नाजायज ढंग से प्रभावी कुर्सियां पर जमे लोग बाहरी अधिकारियों के इशारे पर ही काम कर तहसील के कामकाज प्रभावित करते रहेंगे। होना ये चाहिए जितने कोटवार अथवा कच्चे के लोग कुर्सियों पर जमे है अविलंब उन्हें निकाल बाहर करने की कार्यवाही हो, ताकि तहसील के कामकाज में अब भी लग रहे बदनुमा दाग बन्द हो सके।

जिले के माई बाप से उलझना है इनकी फितरत

बता दें जहां जहां यह अधिकारी पदस्थ रहे अपनी मूल जवाबदेही और कर्तव्यों का निर्वहन न करते हुए जिले के मुखिया के कामकाज की मुखबिरी करना और अनर्गल प्रलाप के अफवाह फैलाना मानो इनका धर्म रहा हो जिसके चलते अनेको बार सरकार के समक्ष भी किरकिरी हुई है। वर्तमान में मुंगेली जिले से बाहर होने के बावजूद यह कुत्सित प्रयास मुंगेली जिले में करते देखा जा रहा है।

बहरहाल अपनी हरकतों और लापरवाही से बाज नही आ रहे सम्बंधित अधिकारी के पल पल की अपडेट शासन के समक्ष पहुंच रही है।

IPS जीपी सिंह नही बच सके तो ये सख्स क्या है..

बता दें छत्तीशगढ़ में बहुत से अफसरों द्वारा मुगालते में रहने की आदत रही है कभी मंत्री को मित्र तो कभी नेताओ को रिश्तेदार बता हर नाजायज काम को अंजाम देने में सफल होते देखा जा सकता है। मगर सनद रहे ऊपर वाले के लाठी में आवाज नही होती और जब पड़ती है तब कोई खेवनहार भी नही होता। ताजातरीन उदाहरण निलंबित आइपीएस जीपी सिंह के कर्मकांड और कार्यवाही से देखा जा सकता है। निश्चित ही देरसबेर मुंगेली जिले के राजस्व व्यवस्था को प्रभावित करने में लगे कुछ लोगो का पर्दाफाश होगा जिसमें पुर्व पदस्थ रहे अधिकारियों, पटवारियों के कारनामे उजागर होंगे बड़ी कार्यवाही भी देखने को मिलेंगी।

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