छत्तीसगढ़: मैनपाट के बिसरपानी में भू-स्खलन, कई मकान धंसे, खेतों में दरारों से फसल बर्बाद, पेड़ भी गिरे

भू-स्खलन से घर में आई दरारें

अम्बिकापुर। हफ्ते भर से हो रही बारिश का असर, इससे पहले भी कई गांवों में हो चुकी ऐसी घटना, 10 साल पहले शुरू हुआ भू-स्खलन धीरे-धीरे बढ़ रहा
बड़ा हादसा टला… तीन दिन पहले घर में हल्की दरारें आने पर परिजन घर छोड़कर दूसरे के यहां रह रहे थे।

हफ्ते भर से हो रही तेज बारिश के कारण छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से मशहूर मैनपाट में भू स्खलन शुरू हो गया है। यहां के बिसारपानी गांव में भू-स्खलन से एक ग्रामीण का घर धंस गया। वहीं दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। इसके साथ ही भू-स्खलन से छह एकड़ खेत भी धंस गए हैं, जिससे फसल बर्बाद हो गई।

साथ ही कई पेड़ भी गिर गए। इससे गांव में लोग दहशत में हैं। मैनपाट में अब तक सात सौ मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है। यहां इससे पहले परपटिया, पैगा, पैगहवापारा में जमीन धंसने की घटना हो चुकी है। जंगल, पहाड़ इलाके वाले मैनपाट में करीब दस साल पहले भू-स्खलन शुरू हुआ था, जो अब धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। ऊपरी इलाके वाले गांवों में भू स्खलन हो रहा है। बिसरपानी में हरिनाथ मझवार के मकान में तीन दिन पहले हल्की दरारें शुरू हुई थीं।

परिवार के लोग खतरे को देखते हुए घर छोड़कर दूसरे के घर रह रहे थे। सोमवार को परिजन लौटे तो देखा कि घर के अलावा जमीन भी धंसी हुई है। कई जगह मोटी और चौड़ी दरारें आ गई हैं। यही स्थिति खेतों में है। ग्रामीण की छह एकड़ जमीन है, जिसमें मक्के की खेती की है। घटना का पता चलने के बाद तहसीलदार शशिकांत दुबे ने राजस्व अमले के साथ गांव का जायजा लिया।

लापरवाही के कारण: जंगल कम होता गया खदानों में ब्लास्टिंग भी बन रही इसका कारण

जानकारों का कहना है कि यह समस्या एक दो दिन में खड़ी नहीं होती है। मैनपाट में भू-स्खलन के कई कारण है। जंगल कम होता जा रहा है। पेड़ कटने से मिट्‌टी कमजोर हो रही है। तेज बारिश में ऊपरी इलाके से पानी तेजी से आता है, जिससे इस तरह की घटनाएं होती हैं। वहीं बाॅक्साइट खदानों में होने वाली ब्लास्टिंग भी बड़ा कारण है।

अभी पथरई, नर्मदापुर, बरिमा इलाके में बाॅक्साइट खदानें चल रही हँ। पिछले दो दशक से वहां बाॅक्साइट उत्खनन किया जा रहा है। कई गांवों में खदानों के आसपास ही घर है। ग्रामीण शिकायत करते रहे हैं कि ब्लास्टिंग जब होती है तब घरों तक उसका असर रहता है।

मंत्री ने किया फोन, जांच के लिए पहुंचे अधिकारी

घटना का पता चलने पर क्षेत्र के विधायक ने अधिकारियों को फोन कर घटना की जानकारी दी और गांव जाकर स्थिति का पता लगाने को कहा। तहसीलदार शशिकांत दुबे ने कहा कि जिस ग्रामीण के घर और खेत में भू-स्खलन हुआ है, उसे दूसरे के घर शिफ्ट कर दिया गया है। मुआवजा के लिए प्रकरण तैयार किया जा रहा है।

समुद्र तल से 1085 मीटर ऊंचाई पर बसा है मैनपाट

मैनपाट समुद्र तल से 1085 मीटर ऊंचाई पर बसा हुआ है। इसे छत्तीसगढ़ का शिमला भी कहा जाता है। ऊपरी इलाके में 19 पंचायतों में 80 हजार लोग रहते हैं। जंगल और पहाड़ से घिरे मैनपाट में हरियाली पहचान रही है। ठंडे इलाके के लिए यह क्षेत्र जाना जाता है।

एक्स्पर्ट व्यू; भू-स्खलन से बचने के लिए क्षेत्र में पौधरोपण करना ही एकमात्र उपाय है: मुखर्जी

मैनपाट की ऊपरी जमीन की बनावट क्ले और लटेरिटीक है। इस क्ले की बनावट मोंटमोरलिओंनाईट और इलाइट ग्रुप की है। अति वृष्टि के कारण जब इन क्ले में पानी का योग होता है, तब इनमें फैलाव होता है। जिससे क्ले की पकड़ कमजोर हो जाती है और दरार या भूमि में खिसकाव देखा जा सकता है। मैनपाट में नीचे की चट्टान बेसाल्ट है जो एक कठोर चट्टान है। मैनपाट में जिन स्थान में खाई है वहां बेसाल्ट का आउटक्रॉप है। वहां पर क्ले का जमाव पानी के ढाल के कारण नहीं हो पाता है, इसलिए यहां भू स्खलन की घटना न्यूनतम है। इससे बचने का उपाय पौधरोपण ही है।

-विमान मुखर्जी, भूगर्भ शास्त्री

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