अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
बेंगलुरु। महामहिम राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने आज राजभवन में बसवराज बोम्मई (61वर्षीय) को
कर्नाटक के तेईसवें मुख्यमंत्री के पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। इससे पहले बाईस में से केवल तीन मुख्यमंत्री ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाये थे। शपथ ग्रहण के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरुप्पा सहित भाजपा के कई बड़े केंद्रीय और राज्य के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। शपथग्रहण से पहले नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री बोम्मई भगवान श्रीमारूति मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। बताते चलें नये मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को पूर्व सीएम येदियुरुप्पा का शिष्य और बेहद चहेता माना जाता है , विधायक दल की बैठक में येदियुरुप्पा ने ही बोम्मई के नाम का प्रस्ताव रखा। शपथ लेने के बाद बोम्मई ने येदियुरप्पा के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। बोम्मई को जनता दल से भाजपा में लाने वाले येदियुरुप्पा ही माने जाते हैं। बीएस येदियुरप्पा के करीबी कहे जाने वाले बोम्मई को सीएम बनाकर भाजपा ने पूर्व सीएम और लिंगायत समुदाय दोनों को ही साधने का प्रयास किया है। बोम्मई भी उसी लिंगायत समुदाय से आते हैं , जिससे येदियुरप्पा का ताल्लुक था। दरअसल कर्नाटक में येदियुरुप्पा भाजपा की मजबूरी हैं , लिंगायत समुदाय से आने वाले येदियुरुप्पा से किनारा करने का मतलब चुनावी दंगल में पछाड़ खाना है जो भाजपा पहले भी झेल चुकी है। बसवराज के मुख्यमंत्री बनने से यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भी येदियुरप्पा का प्रभाव कर्नाटक की राजनीति में बना रहेगा। बसवराज बोम्मई का सियासी अनुभव भी उनके सीएम बनने की दिशा में काम आया।इनके पिता एसआर बोम्मई भी वर्ष 1988 -1989 में 281 दिन के लिये राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जबकि स्वयं बसवराज भी पूर्व मुख्यमंत्री बी०एस० येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकार में गृह , कानून , संसदीय एवं विधायी कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बोम्मई ने भले ही जनता दल के साथ राजनीति की शुरुआत की थी , लेकिन अब उन्होंने बीजेपी के मजबूत नेता के तौर पर अपनी छवि बनायी है। इंजीनियरिंग और खेती से जुड़े होने के नाते बसवराज को कर्नाटक के सिंचाई मामलों का जानकार माना जाता है। राज्य में कई सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू करने की वजह से उनकी तारीफ होती है। बोम्मई की शैक्षणिक योग्यता , प्रशासनिक क्षमतायें और येदियुरप्पा व भाजपा के केंद्रीय नेताओं से करीबी इस पद के लिये उनके चयन की प्रमुख वजहों में बतायी जा रही है।
गौरतलब है कि बसवराज बोम्मई का जन्म हुब्बल्ली में 28 जनवरी 1960 हुआ था। वे लिंगायत समुदाय से आते हैं और कर्नाटक के पूर्व सीएम येदिुयरप्पा के भरोसेमंद माने जाते हैं।ये वर्ष 1998 और वर्ष 2004 में धारवाड़ स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से कर्नाटक विधान परिसद के सदसू के रूप में चुने गये। बोम्मई ने भाजपा में शामिल होने से पहले एच०डी० देवगौड़ा और रामकृष्ण हेगड़े सहित अनेकों वरिष्ठ नेताओं के साथ काम किया है। इन्होंने वर्ष 2008 में बीजेपी ज्वाइन किया था और उसके बाद ये पार्टी रैंक में आगे बढ़ते गये। पेशे से इंजीनियर बसवराज बोम्मई दो बार के एमएलसी और तीन बार शिग्गांव से विधायक हैं। वे कर्नाटक में भाजपा विधायक दल का नेता भी रह चुके हैं। बोम्मई के पिता एस०आर० बोम्मई जनता परिवार के दिग्गज नेता थे और वे कर्नाटक के ग्यारहवें मुख्यमंत्री थे। बसवराज बोम्मई ने मकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इन्होंने पुणे में तीन साल तक टाटा मोटर्स में काम किया और फिर उद्यमी बने।बोम्मई प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से आते हैं और येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से हैं। राज्य की कुल आबादी में समुदाय की हिस्सेदारी 16-17 प्रतिशत है और इसे भाजपा के मजबूत वोटबैंक के तौर पर देखा जाता है। बसवराज ने अपना राजनीतिक सफर जनता दल से शुरू किया था और दो बार ( वर्ष1997 और वर्ष 2003) में कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य रहे। वे मुख्यमंत्री जे० एच० पटेल के राजनीतिक सचिव भी रहे और परिषद में विपक्ष के उपनेता भी रहे। बोम्मई ने जनता दल (युनाइटेड) छोड़कर फरवरी वर्ष 2008 में भाजपा का दामन थाम लिया और उसी साल हुये विधानसभा चुनावों में हावेरी जिले के शिगगांव निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुये। इसके बाद वे वर्ष 2013 और वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों में भी इस सीट से निर्वाचित हुये। परिवार की बात करें तो बोम्मई का विवाह चेनम्मा से हुआ है और उनके एक बेटा व एक बेटी हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने वाले बाईस नेताओं में से केवल तीन मुख्यमंत्री ही अपना कार्यकाल पूरा कर सके। येदियुरप्पा ने चार अलग-अलग कार्यकालों के जरिये कुल 1901 दिनों के लिये मुख्यमंत्री का पद सम्हाला। जब तक कर्नाटक में अब तक 09 मौकों पर मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल का एक साल भी पूरा नहीं कर सके। बताते चलें कि सीएम बोम्मई आज शाम ही कैबिनेट की मीटिंग बुलायेंगे जिसमें सीनियर अधिकारियों संग बैठक में बाढ़ और कोरोना की स्थिति को लेकर चर्चा करेंगे।