मुंगेली। महान उपन्यासकार, कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर आगर साहित्य समिति मुंगेली ने उनकी प्रसिद्ध कहानी बूढ़ी काकी पर चर्चा गोष्ठी संग काव्य गोष्ठी का आयोजन किया । कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं प्रेमचंद की छाया चित्र पर माल्यार्पण एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ । कार्यक्रम में सबसे पहले समति के उपाध्यक्ष महेन्द्र यादव द्वारा आगर साहित्य समिति द्वारा कोरोना काल में किये गये साहित्यिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया ।कोरोना काल व लाकडाऊन के समय ऑनलाइन कवि सम्मेलन के माध्यम से देश प्रदेश की कवियों को सहभागी बनाया गया । समिति के सचिव देव गोस्वामी द्वारा कोरोना काल की विषम घड़ी में समिति द्वारा जरूरतमंदों को किए गए आर्थिक सहयोग की बात को रखा गया । तत्पश्चात श्रीमती सुधा रानी शर्मा एवं ज्वाला प्रसाद कश्यप द्वारा प्रेमचंद की कहानी बूढ़ी काकी का वाचन किया गया। कहानी वाचन के बाद विज्ञान महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. चंद्रशेखर सिंह एवं एसएनजी महाविद्यालय के प्राध्यापक अशोक गुप्ता द्वारा बताया गया कि किस तरह से यह कहानी आज भी हमारे आसपास की लगती है । बुढ़ापा तो बचपन का पुनरागमन है । प्रथम सत्र चर्चा गोष्ठी का संचालन आगर साहित्य समिति के अध्यक्ष देवेंद्र परिहार ने किया । कार्यक्रम में संरक्षक जेठमल कोटडिया भी उपस्थित रहे ।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुंगेली एसडीओपी तेजराम पटेल ने कहा- “मुंशी प्रेमचंद की कहानी या उपन्यास हृदयस्पर्शी रहे हैं । भाषा की सहजता, ग्रामीण परिवेश, पात्रों के नाम और विषय वस्तु हमेशा अपने आसपास के लगने वाले होते हैं । पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं आगर साहित्य समिति मुंगेली के संरक्षक अनिल सोनी ने कहा- “निश्चित रूप से प्रेमचंद को पढ़कर मन गदगद हो जाता है । उनकी कहानियों को पढ़कर मन नहीं भरता । पढ़ते रहने की इच्छा बनी रहती है । आगर साहित्य समिति को इस गरिमामयी कार्यक्रम के लिए बधाई देता हूं एवं मेरा स्नेह वह सहयोग सदैव बना रहेगा । इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं आगर साहित्य समिति के संरक्षक मनोज अग्रवाल ने कहा- “मुंशी प्रेमचंद की कहानी निश्चित रूप से हमेशा हमारे आसपास का दिखलाई पड़ता है । लेकिन वर्तमान को बदलाव के साथ देखना चाहिए ।” इस अवसर पर प्रेस क्लब सचिव योगेश शर्मा ने कहा- “प्रेमचंद की रचना कालजयी रचना है । वर्षों के बाद भी उनके विषय आज के लगते हैं। प्रेमचंद की प्रगतिगामी दृष्टि तभी प्रासंगिक बनी रह पाएगी जब आज के परिवेश में नए पाठक वर्ग तैयार होंगे। योगेश ने आगे बताया कि प्रेमचंद में युगीन प्रगतिगामिता के सार तत्व मौजूद हैं। प्रेमचंद ऐसे रचनाकार के रूप में उभरे जिसकी रचनाओं में प्रगतिशीलता के तत्व सर्वत्र बिखरे पड़े हैं। प्रेमचंद ने सही मायने में साहित्य को समाज का दर्पण बना दिया।ग्रामीण परिवेश का सजीव चित्रण उनके जैसे विरले ही होते हैं । इस अवसर पर मैं उन्हें नमन करता हूं ।
विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित पत्रकार प्रमोद पाठक ने कहा- “मानव जीवन के हर पहलू को छूने वाले अनूठे कलमकार का नाम मुंशी प्रेमचंद है । वे सदैव पाठक के हृदय में बसने वाले हैं । उन्हें जयंती के अवसर पर उन्हें नमन करता हूं ।” कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा ने कहा- “हमारे आसपास घटने वाली घटनाएं एवं परिणाम, उनकी रचनाओं में जीवंत होता दिखता है । इसलिए मुंशी प्रेमचंद हर उम्र के पाठकों को भाने वाले हैं । मैं इस अवसर पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं एवं अगर साहित्य समिति मुंगेली को बधाई देता हूं ।”
चर्चा गोष्ठी पश्चात द्वितीय सत्र काव्य गोष्ठी का रहा । जिसमें समिति के उपस्थित सदस्यों ने अपनी एक-एक रचना का पाठ किया । इस अवसर पर समिति के संरक्षक कृष्ण कुमार भट्ट, संरक्षक डॉ अजीज रफीक, कोषाध्यक्ष जगदीश प्रसाद देवांगन काव्यपाठ किया । आगर साहित्य समिति के अध्यक्ष देवेंद्र परिहार ने तिरंगा के सम्मान में, रवीन्दर छाबड़ा ने देशभक्ति पूर्ण रचना, महेंद्र यादव एवं स्वतंत्र तिवारी की गजलों ने तालियां बटोरी । राकेश गुप्त निर्मल ने व्यंग रचना प्रस्तुत किया । सचिव देव गोस्वामी एवं संतोष वैष्णव ने अपनी रचनाओं रचनाओं से गुदगुदाया । अविनाश श्रीवास ने देश के शहीदों को याद किया । रोहित ठाकुर ने पर्यावरण की जागृति की बात की । अशोक यादव ने वर्षा ऋतु एवं किसान के गीत गाये । राजेश सोनी एवं रामा साहू ने भी अपनी रचना से श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित किया । हेमंत कश्यप एवं रामकुमार बंजारे ने छत्तीसगढ़ी गीत से आनंदित किया । काव्य गोष्ठी का संचालन युवा कवि प्रसन्न चोपड़ा ने किया एवं आभार प्रदर्शन आगर साहित्य समिति के अध्यक्ष देवेंद्र परिहार ने किया ।


