मेहरबान हुआ मौसम, दीमक पर…! बारिश का इंतजार कर रहे किसानों की नई परेशानी

रायपुर- मौसम किसानों पर नहीं, दीमक पर मेहरबान बना हुआ है। यह न केवल तीव्र गति से अपना परिवार बढ़ा रहा है बल्कि प्रारंभिक अवस्था में आ चुके धान के पौधों को भी नष्ट कर रहा है। इससे किसान दोहरे संकट में आ चुका है।

बीते एक साल से संकट का सामना कर रहे किसान के सामने इस समय वह कीट चुनौती देते हुए खड़ा है, जिसे दीमक के नाम से पहचाना जाता है। सिंचाई के लिए पानी का इंतजार करते किसानों को दीमक की यह चुनौती न केवल संकट में डाल रही है बल्कि इस पर नियंत्रण के लिए जरूरी उपाय पर भारी रकम भी खर्च करनी पड़ रही है। मगर नदारद हैं, वे कृषि सलाहकार जिनकी तैनाती मैदानों में की गई है। लिहाजा कृषि दुकानें ही आपदा की इस घड़ी में मदद कर रही हैं और दे रहीं हैं, प्रभावी नियंत्रण के लिए दवाएं।

ऐसे पहुंचा रहा नुकसान

रात में सक्रिय रहने वाला दीमक, एक ऐसा कीट है जो भूमि के भीतर अंकुरित पौधों पर पहले हमला बोलता है। इसके बाद बच गए पौधों को जड़ और तने से काटता है। वयस्क होने के बाद यह और भी अधिक हमलावर हो जाते हैं। धान, गेहूं के अलावा सरसों और राई को भी निशाना बनाते हैं। सब्जियों में सर्वाधिक आसान शिकार, टमाटर, मिर्च, बैंगन, पत्ता और फूलगोभी व मूली की फसल मानी गई है।

हैंं कई उपाय

दीमक प्रकोप से बचाव और नियंत्रण के लिए है तो तीन उपाय लेकिन सबसे अधिक प्रभावी रासायनिक उपाय को माना गया है। इसमें केवल क्लोरोपायरीफॉस को ही भरोसेमंद माना गया है। इसकी मात्रा रखें दो लीटर । रेत के साथ मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा जैविक और परंपरागत ज्ञान आधारित दवाएं भी हैं, लेकिन इन्हें ज्यादा भरोसेमंद नहीं पाया गया है।

ऐसे पहचानें

दीमक प्रकोप के लक्षण की पहचान की सबसे सरल विधि जो बताई गई है वह यह है कि मक्का का वह हिस्सा उपयोग में लाया जाए ,जिसके दाने निकाले जा चुके हैं। इसे पानी भरे घड़े में भरने के बाद प्रभावित क्षेत्र में दबा दें। ध्यान रखें कि उपर का हिस्सा जमीन से कुछ बाहर निकला हुआ होना चाहिए। कुछ समय बाद निकालें। महीन कीट दिखाई दें तो दीमक की पुष्टि हो जाती है। इसके अलावा यही प्रक्रिया कंडे के साथ अपनाई जाने पर भी पहचान आसान होती है।

“दीमक पर नियंत्रण के लिए प्रभावित क्षेत्र में पानी भरकर समस्या दूर की जा सकती है, इसके अलावा क्लोरोपायरीफ़ॉस का छिड़काव करें”।

  • डॉ. एस आर पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट (एग्रोनॉमी) इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर

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