लावारिस जैसी दिख रही “मुंगेली नगर पालिका परिषद”, हर गली में आवारा मवेशियों की झुंड

~ रोका छेका नही रही प्रभावी
~ भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष संतुलाल के खिलाफ मुकदमे के बाद पक्ष,विपक्ष का प्रभाव नही दिख रहा
~ दो साल में मुंगेली नगर पालिका की नही दिख रही कोई उपलब्धि

मुंगेली। कहावत है जब किसी मुखिया के नही रहने पर वहां की पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे हो जाती है। छत्तीसगढ़ राज्य के मुंगेली जिले में नगर पालिका परिषद की दुर्गति के बाद यह जनचर्चा का विषय बना हुआ है। जहां नाली घोटाले मामले में अध्यक्ष सहित अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर होने के बावजूद मुंगेली नगर पालिका के सेहत में कोई खास फर्क नजर नही आ रहा अभी भी अधिकारी, कर्मचारियों बेलगाम ढंग से ही है। सरकार की कोई भी योजना या कहें नगर पालिका परिषद के रोजमर्रा के काम सही ढंग से क्रियान्वित नही हो रहे है। अभी भी अनियमितता, भ्रष्टाचार का बोलबाला नजर आ रहा है।

पूरे शहर के सभी वार्डो,गली मोहल्लों के आवारा मवेशियों की लगी रहती है झुंड

बता दें 22 वार्डो वाले मुंगेली नगर पालिका परिषद के सभी वार्डो,गली मोहल्ला में आवारा मवेशियों के बीच रोड में बैठे रहने के चलते वाहन तो दूर लोगो का मोटर साईकिल से निकलना मुश्किल है। इस पूरे मामले में जिला प्रशासन बेखबर है और पूरे शहर में आवारा मवेशियों, गन्दगी नुमा माहौल का आलम पसरा हुआ है। इस संबंध में ताज्जुब तब होता है जब 22 पार्षदों के बावजूद किसी भी पार्षदों द्वारा हर लोगो से जुड़ी इस समस्या के लिए कोई मौखिक, लिखित शिकायत भी ना करना बेहद शर्मनाक है।

रहने को तो अतिक्रमण, आवारा पशुओं को सार्वजनिक स्थानों से हटाने नगर पालिका परिषद के पास पर्याप्त संसाधन बल है।बावजूद कार्यवाही नही की जाती है जिससे शहर में अब पार्षदों के भी होने अथवा नही होने की चर्चा हो रही है। क्या पार्षद लोगो की समस्या के लिए मूकदर्शक ही बने रहेंगे अथवा जनहित से जुड़े मुद्दों में आवाज उठाएंगे।यह बड़े चिंतन का विषय है।

पुलिस करती है किसी घटना का इंतजार

मुंगेली नगर पालिका के सभी तरफ हो रहे तेजी से अतिक्रमण व आवारा पशुओं के झुंड के लिए मुंगेली पुलिस कभी सीधे कार्यवाही नही करती है मुंगेली पुलिस को मानो किसी बड़े विवाद अथवा घटना के होने के बाद अपना रोल नजर आता है जबकि शहर में हो रहे अतिक्रमण, आवारा पशुओं के यातायात अव्यवस्था में पुलिस भी बरोबर जिम्मेदार है बावजूद कभी कोई आवारा पशुओं को हटाने अथवा अतिक्रमण के लिए कोई ठोस कार्यवाही करते नही दिख रही है।

…लो फिर आ गए किराये के सीएमओ

बता दे भाजपा की नगर सरकार के बाद मुंगेली नगर पालिका परिषद में कोई भी सीएमओ आना नही चाहता जिसके बहुत से कारण है मानो मुंगेली नगर पालिका में भयंकर भ्रष्टाचार, अनियमितता,सत्ता पक्ष विरोधी मुंगेली नगर पालिका की भाजपा शासित सरकार रहने के बाद पक्ष विपक्ष के समन्वय अभाव में कोई भी सीएमओ का काम करना बड़ा मुश्किल भरा हो गया है। कोई सीएमओ यदि सत्य,निष्ठा से काम करे तो उसके खिलाफ स्थानीय निकायों द्वारा शिकायतें इतनी बना दी जाती है कि थक हार मजबुरन सीएमओ लंबी छुट्ठी पर जा अपना ट्रांसफर कराना ही उचित समझता है अभी तीन चार पूर्ण कालिक सीएमओ के छुट्ठी के बाद ट्रांसफर लेने जैसे हालात के बाद दो दिन पूर्व सीएमओ मनीष वारे ने भी मुंगेली नगर पालिका से किन्ना काटने प्रतिदिन भ्रष्टाचार, मुकदमों के चलते थानों में बयान कोर्ट में पेशी की चक्करों की बजाय छुट्टी लेकर घर बैठना उचित समझा फिर आ गए यहां सीएमओ विकास पाटले जैसे ही अतिरिक्त प्रभार में मनोज बंजारा प्रभारी सीएमओ बना दिए गए है।

प्रभारी सीएमओ से भी है लोगो को उम्मीद

नगर पालिका के बदहाल,बेहाल,भ्रष्टाचार के बावजूद मुंगेली नगर पालिका परिषद में उधारी में पहुंचे अस्थायी सीएमओ मनोज बंजारा को चूंकि मुंगेली नगर पालिका परिषद का खास अनुभव है जिसके चलते अब अस्थायी सीएमओ मनोज बंजारा से आवारा पशुओं के खिलाफ कार्यवाही सहित नगर पालिका के तमाम कामो के कुशलता से होने की उम्मीद जताई जा रही हैं। अब देखना यह भी होगा कि शहर में व्याप्त आवारा पशुओं के आतंक व मुंगेली नगर पालिका परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमित कार्यप्रणाली में अंकुश लगाने अस्थायी सीएमओ मनोज बंजारा कितना सफल हो पाते है अथवा यहाँ की बदली आब हवा को समझ वो भी प्रभार मुक्त हो छुट्टी पाना चाहेंगे।

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