रूस के दूतावास ने किया ये चौंकाने वाला खुलासा
नई दिल्ली। अफगानिस्तान पर जबसे तालिबान ने कब्जा किया है, देश में खलबली मची हुई है। पिछले 48 घंटों से यहां सर्वाधिक हड़कंप मचा हुआ है। तालिबान के काबिज होने के साथ ही राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए थे। लेकिन वे अकेले नहीं भागे। वे अपने साथ अच्छा खासा रुपया-पैसा बटोरकर ले गए हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के भागने के संबंध में रूस के दूतावास ने चौंकाने वाला दावा किया है। रूसी दूतावास का कहना है कि अफगानिस्तान से भागते हुए अशरफ गनी एक हेलीकाप्टर और चार कारों में कैश भरकर ले गए हैं। कुछ कैश सड़क पर पड़ा मिला है। यह जानकारी रूस की आरआइए एजेंसी ने दी है। रूस ने यह भी कहा है कि उनका तालिबान से निरंतर संपर्क बना हुआ है।
रूसी न्यूज एजेंसी RIA और कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से एजेंसी ने कहा कि अशरफ गनी को कुछ पैसा छोड़कर ही जाना पड़ा क्योंकि वह उसे रख नहीं पा रहे थे। काबुल में रूसी दूतावास के प्रवक्ता निकिता इंशचेन्को ने कहा, ‘चार कारें कैश से भरी हुई थीं। उसके बाद उन्होंने कुछ रकम हेलिकॉप्टर में रखी। इसके बाद भी वह पूरा पैसा नहीं रख पाए और कुछ पैसे यूं ही छोड़कर निकल गए।’ रूसी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि एक प्रत्यक्षदर्शी से मिली जानकारी के अनुसार वह यह बात कह रहे हैं।
फिलहाल अशऱफ गनी कहां हैं, यह किसी को भी मालूम नहीं है। हालांकि रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि वह ओमान पहुंच गए हैं और उन्हें ताजिकिस्तान और कजाकिस्तान ने अपने देश में आने की अनुमति नहीं दी। कहा जा रहा है कि वह ओमान होते हुए अमेरिका निकलने की तैयारी में हैं। अफगानिस्तान से निकलने से ठीक पहले फेसबुक पर लिखी एक लंबी पोस्ट में अशरफ गनी ने कहा था कि वह देश में खूनखराबे को रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं। गनी ने कहा था कि यदि वह यहां बने रहेंगे तो उनके समर्थक भी सड़कों पर आएंगे और तालिबान के हिंसक रवैये के चलते खूनखराबा होगा।
तालिबान ने रविवार को काबुल में एंट्री की थी। इसके साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान के लगभग समूचे क्षेत्र पर कब्जा जमा लिया है। अमेरिका और नाटो सेनाओं की वापसी के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान में आतंक मचाया है। कंधार, गजनी समेत तमाम बड़े शहरों पर कब्जा जमाते हुए तालिबान काबुल आ धमका है। महज 22 दिनों में ही तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमा लिया है। इससे अमेरिका के संरक्षण में तैयार 3 लाख सैनिकों की अफगान सेना को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसने एक के बाद एक तालिबान के सामने हथियार डाल दिए है।