सम्पूर्ण जगत के कण कण में श्रीराम विद्यमान -महामहिम राष्ट्रपति

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

अयोध्या। रामकथा की लोकप्रियता विश्वव्यापी है , रामकथा के अनेक पठनीय रूप देश और विदेश में प्रचलित हैं। रामायण में जीवन के उन मूल्यों को समाहित किया गया है जो कि मानवता के लिये जरूरी हैं। रामायण दर्शन के अलावा एक ऐसा ग्रंथ है जो कि हमारे जीवन के हर हिस्से हिस्से के लिये संदेश देती है। रामायण एक ऐसा विलक्षण ग्रंथ है जो रामकथा के माध्यम से विश्व समुदाय के समक्ष मानव जीवन के उच्च आदर्शों और मर्यादा को प्रस्तुत करता है। मुझे विश्वास है कि रामायण के प्रचार-प्रसार के लिये यूपी सरकार का यह प्रयास पूरी मानवता के हित में बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। विश्व समुदाय और युवा पीढ़ी को रामकथा में निहित जीवन मूल्यों से जोड़ना चाहिये।
उक्त बातें महामहिम राष्ट्रपति ने रामनगरी अयोध्या में रामायण कान्क्लेव के शुभारंभ के बाद समारोह को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने रामायण की एक चौपाई का ” सिया राममय सब जग जानीज्ञ, करउ प्रणाम जोरी जुग पानी ” का उल्लेख करते हुये कहा कि संपूर्ण जगत के कण-कण में श्रीराम विद्यमान हैं। हमें हर किसी में सियाराम की प्रतिमूर्ति देखनी चाहिये। समस्त मानवता एक ही ईश्वर की संतान है, यह भावना जन-जन में व्याप्त हो, यही इस आयोजन की सफलता की कसौटी है। भगवान श्रीराम हर किसी में हैं और सभी के हैं। इस रामायण कॉन्क्लेव की सार्थकता सिद्ध करने हेतु यह आवश्यक है कि राम-कथा के मूल आदर्शों का सर्वत्र प्रचार-प्रसार हो तथा सभी लोग उन आदर्शों को अपने आचरण में ढालें। भगवान राम की महत्ता पर जोर देते हुये राष्ट्रपति ने कहा कि राम के बिना अयोध्या , अयोध्या नहीं है। अयोध्या वहीं है जहां भगवान श्रीराम सदा के लिये विराजमान हैं।

राष्ट्रपति का अयोध्या आना सौभाग्य – सीएम

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रपति का अयोध्या आगमन हम सबके लिये सौभाग्य की बात है। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की स्तुति करते हुये कहा कि राम जन-जन के हैं , और व्यापक आस्था के प्रतीक हैं। अगर किसी भी नाम के आगे सर्वाधिक शब्द का प्रयोग हुआ है तो वह भगवान राम का नाम है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति के नाम का भी जिक्र किया। बोले-राष्ट्रपति के नाम के आगे भी श्रीराम का नाम जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शित करता है कि करोड़ों लोगों की सांस व रोम-रोम में राम बसे हैं। राम के प्रति सनातन आस्था संतों व संघ परिवार के मार्गदर्शन के फलस्वरूप पांच शताब्दी के लम्बे इंतजार के पश्चात पांच अगस्त 2020 को वह समय आया था जब पीएम नरेंद्र मोदी ने राममंदिर निर्माण का कार्यारंभ किया था।

युगों-युगों तक प्रेरणा देगा राममंदिर – राज्यपाल

इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि अयोध्या प्राचीन काल से ही संपूर्ण विश्व में विख्यात रही है। राम की जन्मस्थली होने का सौभाग्य भी इस नगर को प्राप्त है। गौरव की बात है कि अवधी साहित्य का लोकप्रिय ग्रंथ रामचरित मानस के लेखन की शुरूआत अयोध्या से ही हुई थी। सांस्कृतिक मानचित्र पर अयोध्या पहला शहर है जहां विभिन्न पंथ के महापुरूष मौजूद रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामनगरी की लोकप्रियता को पुनःस्थापित करने के लिये प्रदेश एवं केंद्र सरकार प्रयासरत है। दीपोत्सव अंतर्राष्ट्रीय आयोजन बन चुका है , मैं भी इसकी साक्षी रही हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने जब राममंदिर का कार्यारंभ किया था तो भी मैं वहीं थी। राममंदिर के शिलान्यास का साक्षी होना गौरव की बात है। राममंदिर वास्तव में राष्ट्र का मंदिर है जो युगों तक प्रेरणा देता रहेगा। इसके पहले रामकथा पार्क में महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दीप जलाकर रामायण कान्क्लेव का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति को रामनामी ओढाकर व राम दरबार का चित्र भेंट किया। वहीं, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने राष्ट्रपति की धर्मपत्नी को बनारसी साड़ी भेंट की। रामकथा शुभारंभ के अवसर पर लोक गायिका मालिनी अवस्थी द्वारा शूट किये गये जन-जन के प्रभु राम…गीत से राष्ट्रपति का स्वागत किया गया , जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया और शामिल हुये लोगों ने जय श्रीराम का नारा लगाया। इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति ने पर्यटन विभाग की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास के अलावा संस्कृति विभाग का पुस्तक विमोचन भी किया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा तथा केंद्रीय रेलवे और कपड़ा राज्यमंत्री दर्शना विक्रम जरदोश भी मौजूद रहीं। इसके पश्चात महामहिम ने रामकथा पार्क , यात्री निवास पर अयोध्या की प्राचीनता – धार्मिकता पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके पश्चात उन्होंने अयोध्या के कोतवाल हनुमानगढ़ी में हनुमंतलाल और श्रीराम जन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला का दर्शन पूजन कर श्रीराम जन्मभूमि में रूद्राक्ष का पौधा लगाया। बताते चलें कि महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रामलला के दर्शन करने वाले देश के पहले राष्ट्रपति और अयोध्या पहुंचने वाले दूसरे राष्ट्रपति बने। आज के 38 साल पहले वर्ष 1983 में देश के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने हनुमानगढ़ी और कनक भवन मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। अयोध्या में सभी कार्यक्रमों की समाप्ति पश्चात वे प्रेसिडेंशियल ट्रेन से अयोध्या से लखनऊ पहुंचे और लखनऊ एयरपोर्ट से दिल्ली रवाना हो गये।
गौरतलब है कि महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने चार दिवसीय उत्तरप्रदेश यात्रा के अंतिम दिन लखनऊ से प्रेसिडेंशियल ट्रेन से आज रामनगरी अयोध्या पहुंचे हुये थे। यहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ देश की प्रथम महिला नागरिक सविता कोविंद , राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर अयोध्या धाम को पूरी तरह से सील कर दिया गया था , सभी एंट्री प्वाइंट पर बैरियर लगा दिये गये थे। स्टेशन सहित राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थल पर कमांडो के विशेष दस्ते ने भी सुरक्षा की कमान सम्हाली थी। बम व डॉग स्क्वायड दिन भर स्टेशन परिसर व आसपास के इलाकों में छानबीन करती रही। रामकथा पार्क की सुरक्षा की जिम्मेदारी राष्ट्रपति भवन के विशेष सुरक्षा दस्ते ने सम्हाली थी। हनुमानगढ़ी व रामजन्मभूमि में राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर खास इंतजाम किये गये थे। राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान रामनगरी अभेद्य सुरक्षा घेरे में कैद दिखी।

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