झारखंड से दिल्ली मानव तस्करी के लिए ले जाई जा रहीं दो नाबालिग किशोरियों को छुड़ाते हुए बिलासपुर चाइल्ड लाइन, बिलासपुर और पेंड्रा RPF टीम के संयुक्त प्रयास से आरोपी मानव तस्कर को गिरफ्तार किया गया। RPF अधिकारियों के अनुसार आरोपी दोनों नाबालिग से दिल्ली में काम करवाने की फिराक में था
बिलासपुर। अधिकारियों ने बताया कि 26 अगस्त को उत्कल एक्सप्रेस से दोनों किशोरियों को काम के बहाने दिल्ली ले जाने की सूचना RPF को मिली. अधिकारियों ने सूचना को गंभीरता से लिया। जांच के निर्देश दिए. RPF की टीम जब तक ट्रेन तक पहुंचती, ट्रेन बिलासपुर से निकल चुकी थी. आनन-फानन में पेंड्रा RPF को सूचित किया गया। RPF पेंड्रा स्टाफ ने जांच शुरू किया। किशोरियों की शिनाख्ती करने तक ट्रेन अनूपपुर पहुंच गई। पेंड्रा और अनूपपुर RPF के साथ बाल अधिकारी के सहयोग से दोनों किशोरियों और उन्हें ले जाने वाले को ट्रेन से उतार कर सारनाथ एक्सप्रेस से बिलासपुर लाया गया।
पूछताछ में पता चला कि बालिकाओं को अन्य राज्यों में मजदूरी करवाने के लिए जबरन ले जाया जा रहा था। पूछताछ करने पर बालिकाओं ने अपना नाम, उम्र-16 वर्ष ग्राम-खरवागढा पो.-जिला सिमडेगा (झारखण्ड) और दूसरी उम्र-17 वर्ष जिला-सिमडेगा (झारखण्ड) बताया गया।छानबीन में पता चला कि आरोपी अन्तोनी लुगुन पिता-मार्टिन लुगुन उम्र-32 वर्ष पता-टुकु टोली ग्राम-पैतानों जिला-सिमडेगा (झारखण्ड) के द्वारा दोनों किशोरियों को दिल्ली ले जाया जा रहा था। मामले की हकीकत जानने के लिए रेलवे चाइल्ड लाइन बिलासपुर के काउन्सलर अल्का फाॅक को उन दोनों नाबालिग किशोरियों को सुपुर्द किया गया। उनके द्वारा चाइल्ड वेलफेयर कमेटी बिलासपुर सरकंडा के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति ने जांच के बाद मामला मानव तस्करी एवं शोषण का होना बताया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ थाना जीआरपी बिलासपुर ने अपराध धारा 363 भादवि के तहत केस दर्ज किया. मामला क्षेत्राधिकार पुलिस चौकी ओडगा जिला- सिमडेगा (झारखण्ड) को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया गया। बेटी से मिलने स्कूल गया बाप आखिर कैसे पहुंच गया जेल ?
हाल के दिनों में बढ़ गए मानव तस्करी के मामलेः
हाल के कुछ सालों में मानव तक्करी के कई मामले सामने आए हैं। दो साल पहले भी इसी तरह से मानव तस्करी का सनसनीखेज मामला सामने आया था। इसमें कई बच्चियों को मानव तस्कर की चंगुल से बचाया गया था। अधिकारियों के छानबीन में यह सामने आया है कि कई बार परिवार की गरीबी की वजह से परिजन बच्चे और बच्चियों को दूसरे प्रदेशों में काम के लिए भेजते हैं। अभी तक ज्यादातर बच्चियां झारखंड की ही बरामद की गईं।