मुंगेली तहसील में पुराने 28 माह के है इतने पाप, नया कोई तहसीलदार धोने तैयार नही,कचहरी की बदहाल व्यवस्था में कोटवारों की है मौज

~ 1500 से अधिक नामांतरण, प्रमाणीकरण के प्रकरण है लंबित

~ तहसील एवं एसडीएम दफ्तर होना चाहिए 50 लोगो का स्टाफ, है मात्र 19

~ कोटवार, खानसामा, कच्चे के कम्प्यूटर ऑपरेटर कर रहे तहसील के संवेदनशील काम

~ नामांतरण, प्रमाणीकरण जैसे सीधे सरल काम मे भी लोग तीन तीन साल से काट रहे चक्कर

~ कलेक्टर के पूरे जिले के तहसीलों के निरीक्षण के बाद चरमराई व्यवस्था में नही हुआ सुधार

रायपुर। बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े तहसील के रूप में रहे मुंगेली तहसील में पिछले दो माह से कामकाज ठप्प पड़ा हुआ है। तहसील कोर्ट के निर्णय तो दूर सामान्य काम भी लोगो के नही हो रहे है। जिसका प्रमुख कारण कोरोना काल मे एक पूर्व तहसीलदार के 28 माह के कार्यकाल में तहसील के कामकाज बंद जैसे रख ऑनलाइन रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर लोगो को गुमराह कर भटकाने का खेल किया जाता रहा जिससे अब तहसील में ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नही है या त्रुटि पूर्ण दिखाए जा रहे है तहसील कार्यालय जहाँ कोटवारों का आतंक है लोगो के प्रमाणीकरण, नामांतरण के सीधे सरल काम भी दो तीन सालों से नही हो रहे है। अब ऐसे में मुंगेली जिले में मुंगेली तहसील के कामकाज की अव्यवस्था देख नए तहसीलदार या तो ट्रांसफर ले अपना सर्विस रिकॉर्ड खराब होने से बच रहे है।

बता दे मुंगेली तहसील में वर्तमान तहसीलदार के पूर्व में जो कार्यकाल रहा उस समय तहसील के कामकाज ठप्प पड़ा रहा। उसके बाद आनन फानन में राज्य सरकार भी पदोन्नति देकर उन्हें इस जिले से बाहर कर दी मगर उनके कार्यकाल में इस तहसील के क्या दुर्गति हुई उसकी सुध कोई नही ले रहा जिससे अब मुंगेली तहसील अपने आप मे विवादास्पद जैसा हो गया है। लाइलाज हुए तहसील में वर्तमान में दो कोटवार पूरा तहसील के कामकाज संभाल रहे है बचत एकाध कोई पदस्थ है भी तो वो विवादों में न रहकर किनारे रहना उचित समझ रहे है। वर्तमान में पदस्थ तहसीलदार अभिषेक राठौर जिनका 15 दिनों में ही स्थानांतरण आदेश क्यों हुआ? यह अपने आप मे एक गंभीर विषय है। बावजूद रिलीव नही होने तक वे ही तहसील के कामकाज संभाले हुए है मगर जो आकर अपने कामकाज के लिए हो हल्ला,नूरा कश्ती और ऊपर से लेकर नीचे तक सिफारिश कराने में सक्षम हो उन्ही के काम हो पा रहे है बाकी शेष काम दूरदराज से आ रहे लोग तहसील के चक्कर काट कोटवारी भेंट के बाद नई सुबह और नए तहसीलदार के इंतजार में है।

आखिरकार इन सब तहसीली दुर्दशा के पीछे असली गायब राजदार के कार्यप्रणाली की जांच और शिकायत जिला प्रशासन में बैठे लोग क्यों नही कर रहे हैं।

फिर उधारी के तहसीलदार से चलाया जाएगा काम

बता दें वर्तमान तहसीलदार अभिषेक राठौर का स्थानांतरण हो गया है जब उनके लिए सही स्थिति निर्मित होगी उनका जाना तय है मगर राज्य शासन ने नए फुल फ़्लैश तहसीलदार के लिए कोई आदेश नही किया है अब ऐसे में जिले के ही किसी अन्य तहसीलदार को अस्थायी तौर पर बैठाया जाएगा बावजूद तहसील में कोटवारों का आतंक नही हटाया जा रहा है।

पटवारी है बेलगाम

जिले में कुछ पदस्थ पटवारी भी वस्तुस्थिति को भांप छोटे छोटे जमीन प्लाट के क्रय विक्रय में बहुत से पेंच फिट कर रजिस्ट्रियां प्रभावित कर राजस्व का नुकसान पहुंचाने में लगे हुए हैं और वांछित लाभ देने में सक्षम अवैध कॉलोनाइजर हो बाहुबली हो या आरटीआई कार्यकर्ता सबके लिए यही पटवारी मेहरबान है।

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