जिला अस्पताल में हुआ पहला सफल ऑपरेशन
मुंगेली। आमतौर पर एक उम्र के बाद घुटने जवाब देने लगते हैं। उठते-बैठते समय असहनीय दर्द के चलते ऑपरेशन कराना मजबूरी बन जाता है। डेढ़ से दो लाख रुपये की रकम खर्च करने के बाद भी कई दिनों तक चलने-फिरने में परहेज करना पड़ता है। लेकिन मुंगेली के जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रेयांश पारख ने घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी विधि से घुटने का ऐसा मुंगेली जिले में पहला ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर दिखाया। ऑस्टियोआर्थराइटिस होने के कारण बहुत से लोगों को घुटना बदलवाना पड़ता है। जिसे ऑर्थोप्लास्टी कहते हैं। यह स्थिति तब बनती है, जब घुटने के जोड़ को सहारा देने वाला कार्टिलोज घिस जाता है। नतीजा, हड्डी आपस में रगड़ती हैं, जो काफी दर्दनाक है। विशेषज्ञों के अनुसार इन स्थितियों को लंबे समय तक घुटने के दर्द के बढ़ने का कारण माना जाता है। ऐसे में यह जानना बेहद मुश्किल है,कि आपके लिए घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी कब जरूरी है। ऐसे इलाज के लिए लोग अब तक मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में जाकर इलाज करा पाते थे और गरीब तबके के लोगों का इलाज कराना संभव नही हो पाता था मगर आज जिला अस्पताल में पहले सफल सर्जरी के बाद अब इस बीमारी के इलाज के लिए बिना किसी खर्च के इलाज होना संभव हो पाया है।
मुंगेली के रामगढ़ की रहने वाली बुजुर्ग महिला भगवती को पिछले दस साल से घुटने में तकलीफ थी। उन्हें उठने-बैठने और चलने में काफी परेशानी होती थी। जिस कारण उनकी टांगे भी हल्की मुड़ गई थी। इसके इलाज के लिए वे जिला अस्पताल के डॉ. श्रेयांश पारख के पास गई। जहां बिना किसी खर्च के डॉ. पारख ने घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी तकनीक से उनके घुटने की तकलीफ का इलाज कर दिखाया। डॉ. श्रेयांश पारख ने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी सबसे सस्ता विकल्प है। चीन, जापान, भारत में इस विधि से कई रोगियों का इलाज सफलतापूर्वक किया जा चुका है।गठिया रोग के इलाज का इजाद करने वाले डॉ. श्रेयांश पारख ने बताया कि घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी जिला अस्पताल।के पहला और सफल रहा। उन्होंने बताया कि घुटना टेढ़ा होने के कारण लोगों को दिक्कतें होती हैं जिसे ऑपरेशन के जरिए ठीक किया जा सकता है। ऑपरेशन के बाद लोगों को उठने – बैठने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है। उन्होंने कहा कि घुटना प्रत्यारोपण में औसतन दो लाख रुपये खर्च होते हैं जबकि जिला अस्पताल में निःशुल्क इलाज किया जा रहा है।