हालांकि मेरी बात हो सकता है बहुतों के गले न उतरे मगर जितने समझे सतर्क रहें, सावधान रहें,घटनाएं किसी भी रूप में बेवजह आने तैयार है…!!
• स्वास्थ्य मंत्री के खासमखास होने के बावजूद किसी मरीज के चिकित्सा के लिए लापरवाही पर क्या कुछ भी बोलने का अधिकार नही?
• कहां है अस्पताल प्रबंधन की कर्तव्यपरायणता के लिए नसीहत और विभागीय कार्यवाही की सिफारिश
• क्यों नही आ रहे सिम्स के बड़े अधिकारी सामने
• विधायक शैलेष पांडेय व पंकज सिंह समर्थकों के अलावा संगठन है भी या नही?
• क्यों हो रहा नया नया षड्यंत्र, प्रशासन के क्या यही है काम?
• वर्ग विशेष के धौंस अथवा लापरवाही के चलते सिम्स में होती आये दिन मरीजों की मौत के खिलाफ क्यों नही होती एफआईआर
• अब पुलिस को मरीजों के पीड़ित परिजनों की शिकायत पर क्या कर देना चाहिए गैर इरादतन हत्या का जुर्म दर्ज

बिलासपुर। कांग्रेस नेता पंकज सिंह जब एक मरीज के बेहतर इलाज के लिए एक अदने से स्टाफ को कड़े शब्दों अथवा उसकी बेवकूफी में असमय हो जाने वाले घटना के लिए यदि कोई मरीज का परिवार अथवा कोई किसी खास मंत्री का समर्थक सामने आकर व्यवस्था सुधारने सिम्स की दुर्दशा के लिए मानलो कुछ भावावेश से डांट डपट या ये कहे हाथापाई कर देता भी दिया हो तो मानो एक असहाय वर्ग और आंदोलन के लिए तक की बात हो रही है। मगर 18 सितंबर की घटना पर सिम्स में यदि उस लैब टेक्नीशियन की बेवकूफी से मरीज की जान जाती तो शायद प्रशासन सामने नही आता और न ही पुलिस गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करती भले ही उसके लिए पीड़ित परिवार कितनो सबूत दलील देता वो किनारे ही रह जाता।

बता दें सिम्स बिलासपुर में मरीजों के साथ दुर्व्यवहार और बेमौत मरने की खबर तो राज्य स्तर पर भी चर्चा में सुनी जाती है। मगर स्वयं विभाग, जिला प्रशासन अथवा किसी अपराध जनित सिम्स कर्मचारियों के गतिविधियों में कभी कोई कार्यवाही देखी सुनी नही जाती और आज पता नही क्यों मगर कांग्रेस नेता पंकज सिंह का पूरा मामला एक गंभीर अपराध के दायरे में लाया जा रहा है बड़े अधिकारी प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं किसी वर्ग विशेष के कार्यवाही नही होने पर सामने आने की बात हो रही है। क्या यही है प्रशासन की व्यवस्था जहां एक अदना सा कर्मचारी आधी रात मरीज को मौत की नींद सुलाने के लिए बेफिक्र हो और फिर उसकी डांट डपट को राजनैतिक रूप दिया जाय। ऐसे में क्या कोई मरीज का इलाज संभव है सिम्स में …बिलकुल भी नही। आज जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के ही निकटतम के साथ अस्पताल के लापरवाहियों के ये कोई आवाज उठाई गई तब उनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण में धारा लगने को पहली बार पुलिस से सुना देखा और धारा लगाते देखा जा रहा है जबकि ऐसी कोई कार्यवाही पुलिस पहले कभी की हो तो स्वयं बता दे प्रेस कांफ्रेंस में!
मगर याद रखना यह बात भी सही है…तमाशा देखने वालों कहीं तमाशा बन न जाना
हालांकि सिम्स अस्पताल की घटना के बाद कर्मचारी की शिकायत व सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्य के आधार पर अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया और देर सबेर या तो कानूनी कार्यवाही से गुजर जो भी हो अब पुलिस के अपराध का निपटारा चाहे न्यायालय में जो हो मगर कांग्रेस नेता पंकज सिंह के द्वारा किसी मरीज के लिए आवाज उठाने को लेकर ये दुष्परिणाम भोगना होगा कभी नही सोंचा गया था मगर ये हुआ और इतना ही नही आमजनमानस में ये क्रांतिकारी आवाज प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के लिए जो समय समय मे उठाये जाते है अब किसी षड्यंत्र के तहत ये अध्याय की समाप्ति भी कर दी गई अब चाहे सिम्स प्रबंधन जो करे मरीजों के साथ…सनद रहे कोई बोलने वाला नही होगा। जिसके दुष्परिणाम भी हम शहर वासियों या मरीजों या मरीज के परिजनों को भुगतने पुलिस की कार्यवाही के बाद तैयार रहना चाहिए या फिर सिम्स में हो रहे षड्यंत्र के लिए ऊपर के दबाव नीचे के दबाव (सत्ता पक्ष अथवा विपक्षी) को भूल हर एक नागरिक को एक दिन सड़क पर आना होगा परिणाम चाहे जो हो…!


