
~ कोरोना के संकट में जब पूरा देश जूझ रहा तब सभी ने सहभागिता से अवसर लाभ लिया बाद पैसों के लेनदेन पर बात न बनी तब पुलिस का सहारा लिया जाना कहां तक है उचित?
~ अपहरण की साजिश एक अपराध है मगर उससे बड़ी साजिश स्वयं डाइरेक्टर ने कोरोना अवसर के लाभ में लोगो से पैसे ऐंठ लिया क्या पुलिस की नजर में वो जुर्म नही
~ क्या पुलिस का काम अब धनाढ्य अथवा आर्थिक सक्षम लोगो के लिए ही सुरक्षा अथवा कार्यवाही करने की प्रवृति जैसा हो गया?
~ स्काई हॉस्पिटल में जितने दोषी अपहरण के साजिशकर्ता सहयोगी है उससे कम नही लोगो से पैसे ऐंठने के मामले में स्वयं डाइरेक्टर प्रदीप अग्रवाल।
बिलासपुर। कोरोना में भयावह आपदा में भी कुछ मेडिकल संस्थाओं द्वारा अवसर के लाभ लेने कोई कसर नही छोड़ी गई बाकायदा पूरे साजिश के तहत लोगो से भारी भरकम रकम भी ऐंठे और मौत भी दिया। बिलासपुर पुलिस अभी एक बड़े अपहरण की साजिश कर्ताओं का खुलासा करने जा रही है बहुत हद तक अपहरण के पूरे मामले में बड़ी कार्यवाही कर अन्य प्रांतों से आरोपियों को पकड़ लाने में सफल हो रही है। मगर आज आमजनमानस के बीच सबसे बड़ा सवाल यह देखने को मिल रहा है जब एक लंबे समय तक लोगो को मौत देकर पैसे ऐंठने का जो खेल चला आज उसी के सौदागर पर जब अपहरण की साजिश हुई तब पुलिस सक्रिय हो गई गंभीर अपहरण के मामले में पर्दा उठाने में भी सफल हुई लेकिन पुलिस तब कहां थी जब यही स्काई हॉस्पिटल में बेमौत लोगो के मरने की शिकायत होती रही,लाखों रुपये वसूलने के बावजूद चंद बचे पैसों के नाम लाश को भी रोका जा रहा था तब बिलासपुर पुलिस अपनी कर्तव्यपरायणता का परिचय क्यों नही दी? शायद पुलिस उस समय सक्रिय रहती तो शायद कुछ मौत के खेल में रोक भी लगाया जा सकता था और पैसों के लिए यह जो नाटकीय घटनाक्रम बड़े अपहरण के रूप में सामने आया वो घटना शायद होती ही नही,बहरहाल स्काई हॉस्पिटल के डाइरेक्टर प्रदीप अग्रवाल के अपहरण की साजिश कर्ताओं तक पुलिस अन्य राज्य पहुंच बड़ी कार्यवाही करने जा रही है मगर सवाल अभी भी यही है कि इन सबके पहले लोगो के साथ जो सभी ने मिल अमानवीय चेहरा प्रदर्शित कर सात करोड़ रुपये ऐंठने में सफल रहे सब देखना यह होगा कि जनहित में पुलिस का रुख एक गंभीर अपराध के खुलासे के बाद स्वयं डाइरेक्टर प्रदीप अग्रवाल जो कि बड़े साजिश कर्ता परिलक्षित हो रहे है,उन पर बिलासपुर पुलिस क्या कार्यवाही करती हैं या फिर मामले को अपहरण के मामले में आरोपियों पर कार्यवाही कर इतिश्री कर लेती है।

बता दें कोरोना में हुई कमाई के विवाद पर बिलासपुर के हास्पिटल संचालक का अपहरण करने वाले पाँच अपहरणकर्ताओं को बिलासपुर से भेजी गई टीम ने उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में हास्पिटल में ही पूर्व में काम करने दो डॉक्टर, एक टेक्नीशियन व उनके दो अन्य साथी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों से बैंक के चेक व स्टाम्प भी पैसो के लेनदेन के विवाद पर बिलासपुर के हास्पिटल संचालक का अपहरण करने वाले पाँच अपहरणकर्ताओं को एसपी दीपक झा के द्वारा एडिशनल एसपी निमेष बरैया के नेतृत्व में बनाई गई टीम ने महज पांच दिन बीतने के पहले ही उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद से गिरफ्तार कर लिया है,गिरफ्तार आरोपियों में हास्पिटल में ही पूर्व में काम करने दो डॉक्टर, एक टेक्नीशियन व उनके दो अन्य साथी हैं। गिरफ्तार आरोपियों से बैंक के चेक व स्टाम्प भी बरामद किए गए हैं।
आरोपियो को ट्रांजिट रिमांड पर बिलासपुर लाने की तैयारी पुलिस कर रही हैं। विदित हो कि बिलासपुर के राजकिशोर नगर में स्काई हास्पिटल का संचालन करने वाले 42 वर्षीय प्रदीप अग्रवाल का रविवार 19 सितंबर की शाम को मोपका स्थित एक सेलून की सीढ़ियों से ही पांच आरोपियों ने अपहरण कर लिया गया था,आरोपियो ने अपहरण में अर्टिगा कार का इस्तेमाल किया था,पर जाते जाते प्रदीप अग्रवाल की फोर्ड फिगो कार क्रमांक CG 10- AJ- 1606 को आरोपियो के ही एक साथी ने हास्पिटल के सामने ले जा कर खड़ी कर दी और चाबी लगी हुई छोड़ कर अपने अन्य साथियों के साथ डॉक्टर को ले कर फरार हो गए थे। पर पुलिस का दबाव बढ़ता देख कर 24 घण्टे के अंदर ही अपहरणकर्ता डॉक्टर को दिल्ली एयरपोर्ट में छोड़कर भाग गए थे,जहा फ्लाइट से प्रदीप अग्रवाल पहले रायपुर फिर सकुशल बिलासपुर आ गए थे।
डॉक्टर के काफी टाइम तक घर न पहुंचने पर उनके परिजनों ने रात 10.30को सरकंडा पुलिस को सूचना दी,मामले की जानकारी एसपी दीपक झा को भी दी गई,प्रकरण की गम्भीरता को देखते हुए एसपी श्री झा ने तुरन्त ही साइबर के एडिशनल एसपी निमेष बरैया के नेतृत्व में टीम गठित कर डॉक्टर के खोज बिन व सकुशल वापसी के लिए जरूरी टिप्स देते हुए दिशा निर्देश दिये।एसपी के निर्देश के बाद परिजनों से हुई पूछताछ में पता चला कि प्रदीप अग्रवाल का हास्पिटल में पूर्व में काम करने वाले मुरादाबाद के मूल निवासी डॉक्टर शैलेन्द्र मसीह और डॉक्टर मोहम्मद आरिफ से पैसो के लेन देन को ले कर विवाद चल रहा था।वही दूसरी ओर तब तक हास्पिटल का सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के हाथ लग चुका था,जिसको देख कर हास्पिटल की एक नर्स ने गाड़ी पार्क करने आने वाले किडनैपर की पहचान अस्पताल में ही पूर्व में काम करने वाले डॉक्टर के रूप में की। यूपी के दो नम्बर बिलासपुर आकर हुए ऐक्टिवेट आरोपियो का क्लू मिलने के बाद अपने शक को पुख्ता करने व आरोपियो को ट्रेस करने के लिए एडिशनल एसपी निमेष बरैया व साइबर के एसआई मनोज नायक ने परिजनों से आरोपी डॉक्टरों का नम्बर ले कर आईएमईआई डिटेल निकाला जिसमें यह बात सामने आई कि दो
आरोपियों ने उसी आईएमईआई की ड्युअल सिम वाले मोबाईल में बिलासपुर आ कर यूपी का नम्बर ऐक्टिवेट किया है, साथ ही उनका पुराना नम्बर तो चालू हैं ही।पर बिलासपुर आ कर चालू किया गया एक नम्बर पेंड्रा मे व एक बाद में नागपुर में बंद हो गया,जिससे पुलिस के सामने पूरी पिक्चर क्लियर हो गई।
मुरादाबाद रवाना की गई टीम
रात 12.30 को अपहरण की वारदात स्प्ष्ट होने के बाद आरोपियो की गिरफ्तारी हेतु एसपी दीपक झा ने रात को ही एएसपी निमेष बरैया के सुपरविजन में लाइन के सब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र वैष्णव के नेतृत्व में 3 और
पुलिसकर्मियों(टोटल 4) की टीम आरोपियो के पीछे रवाना कर दी।रात भर एडीशनल एसपी निमेष बरैया व एसआई मनोज नायक साईबर सेल में बैठ कर तकनीकी साक्ष्य जुटा कर पुलिस टीम को आरोपियो के सम्बंध में ब्रीफ करते रहे। आरोपियो का पीछा करते हुए पुलिस टीम भी मुरादाबाद पहुँच गई।
मुरादाबाद में नम्बर हुआ बन्द,कैम्प करती रही पुलिस
मुरादाबाद जा कर आरोपियो ने मोबाईल बन्द कर दिया,तब गयी हुई पुलिस टीम वहां कैम्प कर आरोपियो के तलाश में जुट गई,दूसरी तरफ बिलासपुर में साइबर एएसपी निमेष बरैया व एसआई मनोज नायक लगातार टेक्निकल एविडेंस जुटाने के लिए जूझते रहे व छोटी से छोटी क्लू को मुरादाबाद गयी टीम से शेयर करते रहे,इसी बीच एक आरोपी हास्पिटल के पूर्व टेक्नीशियन फिरोज का क्लू पुलिस को मिल गया, और मिले क्लू के आधार पर सबसे पहले उसे अरेस्ट कर लिया गया।