बिलासपुर में कांग्रेस है या नही…पैराशूट या आपस मे फुट… विधायक शैलेष पांडेय कौन है…?

यहां कांग्रेस में अनुशासन की धज्जियां तो पहले ही उड़ चुकी है, यदि ऐसी अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाने लगी, शायद पार्टी में एक कार्यकर्ता भी न बचे

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस व सरकार के ही कुछ लोगों के बीच गुटबाजी अपने पूरे चरम पर है ये लोग अब अपनी ही पार्टी की किरकिरी करने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इन सबके ऊपर जिस प्रकार से जो वातावरण अभी देखने को मिल रहा है कोई कहना ताज्जुब नही होगा कि असली राजदार कोई और है जिसके वरदहस्त से पुलिस भी अप्रत्याशित निर्णय ले मुकदमा, कार्यवाही कर रही हैं।

प्रदेश में इन दिनों कांग्रेस आंतरिक विवाद तथा गुटों में बंटती दिखाई दे रही है। विवाद कुछ दिन पहले तक राज्य स्तरीय था जिसमें दो
बड़े नेता मुख्यमंत्री पद को लेकर आपस में लड़ते दिखाई दे रहे हैं। अब गुटीय राजनीति प्रदेश के साथ-साथ जिलों में यानी कि जड़ तक पहुंच गई है। ताजातरीन विधायक शैलेष पाण्डेय का बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।

छत्तीसगढ़ प्रांत अभिवाजित मध्यप्रदेश से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है। छाीसगढ़ की धरती ने पंडित रविशंकर शुक्ल स्व.श्यामाचरण शुक्ल, स्व. विद्याचरण शुक्ल, स्व. मोतीलाल वोरा तथा अभिवाजित मध्यप्रदेश के पूर्व पीसीसी चीफ स्व.रामगोपाल तिवारी के साथ ही अनेक ऐसे राजनेताओं ने देश तथा प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया जो अपने आप मेंकांग्रेस थे, एक विचारधारा थे। छत्तीसगढ़ प्रदेश के साथ ही समूचे भारत में इन राजनेताओं ने अपनी अलग छाप छोड़ी। इनके सामने गुटबाजी जैसी कोई बात दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती थी। लेकिन वर्तमान
परिदृश्यों के कारण ही छत्तीसगढ़ प्रदेश में भाजपा ने 15 वर्षों से अधिक समय तक राज किया। कांग्रेस गुटबाजी के कारण सालों से बाहर रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जब पीसीसी चीफ की कमान मिली तो वे कुछ हद तक गुटबाजी समाप्त करने में कामयाब रहे। यह प्रमुख कारण है कि कांग्रेस आज छत्तीसगढ़ में फिर से साा में काबिज है। लेकिन अब जो हालात फिर निर्मित हो रहे हैं, वह कांग्रेस के लिए कतई हितकरी नहीं हो सकते। पार्टी के अन्दर दोहरा मापदंड कांग्रेसी कार्यकताओं के साथ कतई न्याय नहीं कर सकता।

विधायक बृहस्पति सिंह के द्वारा की गई अनुशासनहीनता का दुस्साहस

रामामनुजगंज से 2 बार के विधायक रहे बृहस्पति सिंह ने प्रदेश के कद्दावर नेता मंत्री टीएस सिंहदेव पर मुयमंत्री बनने के लिए हत्या करवाने जैसे आरोप मीडिया के सामने सार्वजनिक रुप से लगाया। पूरे प्रदेश ही नहीं देश के सामने कांग्रेस पार्टी के अनुशासन की धज्जियां उड़ती रही। विधानसभा की कार्यवाही बाधित रही, कार्यवाही बाधित होने के कारण जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद हुए, बृहस्पति सिंह मामले ने इतना तूल पकड़ा की राष्ट्रीय नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा।

हाईकमान के साफ मना करने के बाद भी 52 विधायक तथा कुछ मंत्री दिल्ली पहुंचे

कांग्रेस पार्टी में यदि अनुशासनहीनता की ऐसी कार्यवाही को प्राथमिकता दिया जाए तो शायद एक भी कार्यकर्ता पार्टी में नहीं बचेगें। वाकया जादा दिन का नहीं है आज से तकरीबन एक माहपहले मुख्यमंत्री परिवर्तन की खबरें उड रही थीं सीएम भूपेश बघेल तथा मंत्री टीएस सिंहदेव को हाईकमान ने दिल्ली तलब किया, दोनों नेताओं की दिल्ली दरबार में लगातार पेशी हो रही थी, मुख्यम़ंत्री पद को लेकर मंथन किया जा रहा था। इस बीच छत्तीसगढ़ से विशेष विमान के द्वारा 52 विधायक तथा कुछ मंत्रियों ने दिल्ली कूच कर दिया। हाईकमान को खबर लगते ही प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के माध्यम से किसी भी विधायक को दिल्ली न आने की हिदायत दी गई, पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने वीडियो जारी कर विधायकों से दिल्ली न जाने की अपील की। लेकिन किसी से उनकी नहीं सुना।

क्या यही अनुशासन है?

शैलेष पाण्डेय को कांग्रेस पार्टी ने बी फॉर्म दिया, बिलासपुर की जनता ने चुना तो पैराशूट विधायक कैसे?

अटल पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई क्यों नहीं?

विधायक शैलेष पाण्डेय के उस बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि टीएस सिंहदेव का आदमी होने के कारण हमें पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है। इसी बयान के बाद बिलासपुर से कांग्रेस के नेता अटल श्रीवास्तव ने भी जो बयान दिया या वह अनुशासन के दायरे में है? अटल श्रीवास्तव के द्वारा मीडिया के समक्ष दिए हुए बयान में कहा गया मुझे नहीं मालूम कौन किसका आदमी है, और कौन किसकी औरत है? वे कांग्रे​स के विधायक हैं। इतना जानता हूं कि जो कार्रवाई पुलिस कर रही है वह सबूतों के आधार पर कर रही है। विधायक ने जो बातें कही है वह अनुशासनहीनता के दायरे में आती है। इससे पहले भी वे इसी तरह के बयान दे चुके है। आने वाले समय में हम लोग हाईकमान को अवगत कराएंगे कि ये पैराशूट विधायक हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

अटल श्रीवास्तव ने मीडिया के सामने कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित उम्मीदवार शैलेष पाण्डेय को पैराशूट विधायक कहा। बता दें शैलेष पाण्डेय कांग्रेस पार्टी के द्वारा घोषित किए गए उम्मीदवार के रूप में बिलासपुर से चुनाव मैदान पर उतरे हैं पार्टी के द्वारा हस्ताक्षरित बी फॉर्म निर्वाचन आयोग में जमा किया है उसके बाद बिलासपुर की जनता ने पाण्डेय को विधायक चुना। यदि अटल श्रीवास्तव के बयानों को गंभीरता से लिया जाए तो या सभी निर्वाचित 67 विधायक पैराशूट विधायक है? क्या अटल श्रीवास्तव के ऐसे व्यकत्व पर संगठन कोई कार्यवाही करेगी?

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