• अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर। कृषि का विकास और किसानों का कल्याण छत्तीसगढ़ सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य की खेती किसानी को नई दिशा देने के लिये छग शासन द्वारा उठाये जा रहे कदमों को आज और मजबूती मिल रही है। गावों को स्वावलंबी बनाने में कृषि वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास और इसे किसानों तक पहुंचाने के कार्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत लगभग तीस करोड़ रूपये की लागत से निर्मित भवनों एवं अन्य अधोसंरचनाओं का लोकार्पण करने के बाद कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कही। इस अवसर पर उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित नवनिर्मित कृषि विज्ञान केन्द्र भवन, अक्ती जैवविविधता संग्रहालय, नवनिर्मित नॉलेज सेंटर भवन एवं रिकार्डिंग स्टूडियो तथा फाइटोसेनेटरी प्रयोगशाला के लोकार्पण के साथ वर्चुअल रूप से उद्यानिकी महाविद्यालय जगदलपुर एवं कृषि महाविद्यालय रायगढ़ के नवनिर्मित महाविद्यालय भवन, बालक छात्रावास एवं कन्या छात्रावास भवनों और 16 कृषि महाविद्यालयों में निर्मित ई-क्लासरूम का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने धान , करायत , सोयाबीन , मक्का और रसभरी सहित आठ फसलों की उन्नत प्रजातियों के बीजों तथा विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई चांवल से प्रोटीन और ग्लूकोज को अलग करने की तकनीक का लोकार्पण किया। सीएम ने कहा छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में आज से कृषि विश्वविद्यालय में प्रारंभ हो रही फाईटोसेनेटरी लैब का महत्वपूर्ण योगदान होगा। गांवों के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में अब कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित प्रसंस्करण तकनीक का उपयोग किया जायेगा। गौठानों में गोबर से जैविक खाद के निर्माण , बिजली उत्पादन और वैल्यू एडीशन के कार्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के अनुरूप गांवों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। गौठानों में गोबर से जैविक खाद के निर्माण , बिजली उत्पादन और वैल्यू एडीशन के कार्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिये तकनीक विकसित की गई है , उसका उपयोग गांवों में स्थापित किये जा रहे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में किया जायेगा। कृषि उत्पादों और लघु वनोपज उत्पादों के प्रसंस्करण से किसानों की आय में वृद्धि होगी और लोगों तक शुद्ध कृषि उत्पाद पहुंचेंगे। इन उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता में छत्तीसगढ़ अग्रणी रहेगा। सीएम ने कहा कि राज्य के कृषि क्षेत्र में एक मजबूत वैज्ञानिक-अधोसंरचना का निर्माण करना हमारी प्राथमिकताओं में रहा है। उन्होंने कहा कि किसान और विज्ञान एक-दूसरे के जितने करीब आयेंगे कृषि-क्षेत्र की समृद्धि उतनी ही तेजी से बढ़ेगी। राज्य में कृषि पद्धति के सुधार , फसल विविधीकरण के विस्तार , उत्पादन में बढ़ोत्तरी और वैल्यू एडिशन के माध्यम से किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिये हमने राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक-संगठनों से भी एमओयू किये हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोदो-कुटकी-रागी जैसी लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देने के लिये हाल ही में मिशन मिलेट शुरु किया गया है। इसके लिये आईआईएमआर के साथ अनुबंध किया गया है। इसी तरह लघु वनोपजों के वैल्यू एडीशन से लेकर गौठानों में गोबर से जैविक खाद और बिजली के उत्पादन तक की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये वैज्ञानिकों को ज्ञान और अनुसंधानों का लगातार उपयोग कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में कृषि वैज्ञानिक और किसान मिलकर जो काम कर रहे हैं , उसकी सराहना आज राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है , आज छग प्रदेश पूरे देश को रास्ता दिखा रहा है। सीएम ने कहा कि आज जिस अक्ती जैव विविधता संग्रहालय का लोकार्पण किया गया है , उसमें धान की लगभग 24000 किस्मों , तिंवरा की 1009 , अलसी की 2000 किस्मों सहित विभिन्न किस्मों की कुल 30,878 किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इसके अलावा किसान भाईयों की लगभग 500 से अधिक प्रजातियों का पंजीयन भारत सरकार में कराया गया है। ये प्रजातियां भी जैव विविधता संग्रहालय में प्रदर्शित की गई हैं। इन प्रजातियों का उपयोग नई प्रजातियों के विकास के लिये होगा। विश्वविद्यालय बनने के बाद बाद से आज तक विभिन्न फसलों की कुल 154 प्रजातियों का विकास किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि-उपज और कृषि-उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिये भी हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। अब तक छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादों तथा खाद्य पदार्थों के प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध नहीं थी , लेकिन विश्वविद्यालय में फाइटोसेनेटरी प्रयोगशाला के लोकार्पण के बाद किसान भाईयों को यह सुविधा भी उपलब्ध हो जायेगी। फसल प्रमाणीकरण के बाद वे अपनी उपज और उत्पादों की बिक्री विदेशों में भी कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय के नये नॉलेज सेंटर में मोबाइल एप तैयार किये गये हैं , जिनसे किसान भाई नई- नई जानकारियां लेकर अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं के बारे में भी वे जानकारी लेकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे।कार्यक्रम में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे , विधायक सत्यनारायण शर्मा , छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा , शाकम्बरी बोर्ड के अध्यक्ष रामकुमार पटेल , मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप चौबे , कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह , इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० एस०के० पाटिल सहित अनेक कृषि वैज्ञानिक और प्राध्यापक वर्चुअल रूप से शामिल हुये।