प्रशांत किशोर की टल गई कांग्रेस में एंट्री, पार्टी को सुनाई ‘खरी-खरी’, जानें क्या कहा है चुनावी रणनीतिकार ने

नई दिल्ली। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) का कांग्रेस में शामिल होना फिलहाल कुछ समय के लिए टल गया है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में हुए ‘लखीमपुर प्रकरण’ पर प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के बढ़ते ग्राफ पर चर्चा के बीच प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने इसे ‘गलतफहमी’ करार दिया था, साथ ही कांग्रेस को ग्रैंड ओल्ड पार्टी भी कहा था।

पीके ने जिस तरह प्रियंका और राहुल को लक्ष्य करते हुए कांग्रेस की ढांचागत कमजोरियों का कोई तात्कालिक समाधान नहीं होने की बात कही, उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस के प्लेटफार्म से विपक्षी सियासत को नया स्वरूप देने की उनकी रणनीति जमीन पर उतरने से पहले ही सियासी भंवर में उलझ गई है। कांग्रेस नेताओं ने भी पीके के ट्वीट पर जिस तरह तंज कसा, उससे साफ है कि पार्टी को यह सलाह नागवार लगी है।

लेखक और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई द्वारा एक राष्ट्रीय मीडिया चैनल पर लिखे गए एक लेख के अनुसार सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के बीच सहमति बनी है कि आगामी कुछ महीनों में होने वाले पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें कांग्रेस में शामिल कराया जाए।

वहीं सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी का मानना है कि पीके की एंट्री को पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर के चुनावों के नतीजों से नहीं आंका जाना चाहिए। हालांकि कांग्रेस के नजरिए से देखा जाए तो इस फैसले को सर्वसम्मित भी कहना उचित नहीं होगा, क्योंकि राहुल गांधी का मानना है कि यदि आप किसी को ताकत मानकर पार्टी में शामिल कराना चाहते हैं, तो फिर आगामी पांच राज्यों के नतीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए।

पंजाब में चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने में प्रशांत किशोर की नहीं थी कोई भूमिका, खड़गे ने सुझाया था नाम

लेख में यह भी साफ किया गया है कि पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने में प्रशांत किशोर की कोई भूमिका नहीं थी, यह सुझाव कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सुझाया गया था, जिस पर राहुल गांधी ने फैसला लिया था।

लेख के अनुसार, कांग्रेस में प्रशांत किशोर की एंट्री सिर्फ 2024 चुनावों को लेकर नहीं हो रही है बल्कि पिछले दिनों सोनिया गांधी के साथ हुई मुलाकात में उनके बीच चर्चा पार्टी में सुधार, संगठनात्मक बदलाव, टिकट बांटने की प्रणाली, गठबंधन का पैमाना और चंदे संबंधित मुद्दों पर केंद्रित रही थी।

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