Breaking- हाईकोर्ट ने जुलूस पर रोक के जिला दंडाधिकारी के आदेश को सही ठहराया, दोनों याचिका खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए ईद मिलादुन्न्बी के अवसर पर जुलूस निकालने की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कलेक्टर व वक्फ बोर्ड के फैसले को उचित ठहराया है। कोर्ट ने शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन द्वारा परिस्थिति अनुसार किए गए फैसले पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। याचिकाकर्ता ने वक्फ बोर्ड व कलेक्टर के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें ईद के अवसर के जुलूस निकालने पर पाबंदी लगा दी है।

सैय्यद मकबूल अली ने वकील रोहित शर्मा के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर वक्फ बोर्ड और राज्य शासन के आदेश के मद्देनजर कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी द्वारा जारी जुलूस पर प्रतिबंध के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि वक्फ बोर्ड को मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों की देखरेख व संरक्षित रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बोर्ड को समुदाय के धार्मिक कार्यक्रमों में फतवा जारी करने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्य शासन ने वक्फ बोर्ड की अनुशंसा पर ईद मिलादुन्न्बी के अवसर पर जुलूस निकालने व जलसा करने के साथ ही सामूहिक भोज पर प्रतिबंध लगा दिया है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्य शासन के आदेश के मद्देनजर जिला प्रशासन ने जुलूस पर बैन कर आयोजन से वंचित कर दिया है। याचिकाकर्ता ने दशहरा त्योहार व गरबा के लिए कोविड 19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए उत्सव मनाने की छूट दी थी। कुछ इसी तरह की छूट हमें भी दी जाए।

– राज्य शासन ने रखा अपना पक्ष

राज्य शासन की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कहा कि कोरोना की स्थिति को देखते हुए अनुमति देना उचित नहीं है। यह राज्य का नीतिगत निर्णय है। शीर्ष अदालत के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि यह राज्य का नीतिगत निर्णय है। इस पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।

-हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह कहा

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आरसीएस सामंत ने शीर्ष अदालत द्वारा दी गई व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की ओर से पक्ष रखा गया है कि कोरोना की स्थिति को देखते हुए जुलूस सहित अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति देना उचित प्रतीत नहीं होता।
यह राज्य का नीतिगत निर्णय है और उनका अपना फैसला है। लिहाजा इस पर कोई कार्रवाई करना व हस्तक्षेप करना कोर्ट के लिए उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विभिन्न् जिलों में कोरोना की स्थिति भिन्न्-भिन्न् है। इस कारण किसी जिले में अनुमति दी गई है और किसी जिले में नहीं दी गई है यह आधार नहीं बन सकता। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस सामंत ने याचिका को खारिज कर दिया है।

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