PWD डिवीजन मुंगेली बना भ्रस्टाचारियो का अखाड़ा, निर्माण का पता नही रखरखाव के नाम से करोड़ो का हो गया वारा न्यारा

विपक्षी दलों का मूकदर्शक मुद्रा में रहना समझ से है परे

राजनैतिक आकाओं की शह और दम्भ में वसूली राशि का भी भी किया गया भुगतान, दिया गया आपसी सांठगांठ से कथित ठेकेदार को नया काम

15 अगस्त,26 जनवरी, राष्ट्रीय पर्व में, मुख्यमंत्री आगमन पर व भव्य स्वागत द्वार के नाम निकाली गई लाखों की राशि

आखिरकार ऐसे अनियमितता के बावजूद ऑडिटर कैसा आडिट कर लौट जाते है वापस?

मुंगेलीपीडब्ल्यूडी डिवीजन में कुछ सालों के भयंकर भ्रस्टाचार की हो सूक्ष्मता से जांच

मुंगेली। जिले के सबसे भयंकर भ्रष्ट शासकीय कार्यालयों में शुमार लोक निर्माण विभाग का ईई ऑफिस में पिछले कुछ सालों के रिकॉर्ड की सही जांच हो तो निश्चित रूप से ऊपर से लेकर नीचे तक चौकाने वाले भ्रस्टाचार के मामले उजागर होंगे। जहाँ बीटी पेच,रखरखाव,15 अगस्त,26 जनवरी में खर्च के नाम से लाखों, करोड़ो का वारा न्यारा इंजीनियर, ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ से हुआ। जिसके लिए विभागीय शिकायत के अलावा पुलिस तक मामला पहुंचा मगर बाद में इस पर कोई जांच कार्यवाही नही देखी जा रही है।

मुंगेली लोक निर्माण विभाग अंतर्गत नए निर्माण कार्यो की स्वीकृति, टेंडर हो या न हो मगर पिछली सरकार के समय के ही बहुत से काम ऐसे पेंडिंग है जिसके लिए ठेकेदार भयंकर उदासीन है। काम मे घोर लापरवाही के बावजूद पार्ट पार्ट भुगतान कर कार्य को प्रगति पर ही बता दिया गया। मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है विभाग के कुछ अधिकारी एवं इंजीनियर लंबे समय से फर्जी खेल में अब पारंगत हासिल कर चुके है।

भुगतान कार्यवाही के बाद बहुत से एमवी है गायब,ऑडिटर का ऑडिट भी हो गया

मालूम हो जब भयंकर लॉक डाउन चला या फिर बारिश के दौरान 15 अगस्त अथवा 26 जनवरी में कोई बड़ा कार्यक्रम का भी आयोजन नही किया गया जिसमें भी बाकायदा लाखों रुपयों की राशि मुख्यमंत्री आगमन,15 अगस्त अथवा 26 जनवरी के नाम किसी चहेते ठेकेदारों के फर्म के नाम भुगतान कर राशि आहरण कर ली गई। इसके अलावा जरहागांव,पंडरभठ्ठा अन्य जगहों में अतिथि स्वागत के नाम गेट लगाने के नाम पर लाखो रुपये का भुगतान किया गया बावजूद आडिट की टीम आयी अपने आडिट में इन सब विसंगतियों के बगैर ऑडिट कर चलते बनी। आखिरकार ऐसे ऑडिट क्या सिर्फ खानापूर्ति के लिए विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ से करवाये जा रहे हैं। वैसे तो बहुत से निर्माण कार्य के भुगतान के लिए विभाग के समक्ष फ़ंड के लाले होते है जिनके लिए समय समय पर विशेष फंड भी संभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने स्तर से उपलब्ध करा भुगतान कराया जाता है। ये सब गतिविधियों में मुंगेली पीडब्ल्यूडी का डिवीजन ऑफिस बेलगाम हो गया है। कार्यपालन अभियंता मुख्यालय से बाहर रह भागे भागे दिख रहे हैं। इन सबके बावजूद मुखरता से इन कारनामो की शिकायत के लिए मजबूत विपक्ष दल भाजपा भी विभाग के सामने मूकदर्शक बना हुआ है।

अनैतिक भुगतान के लिर आकाओं से बनाया गया दबाव,वसूली की कार्यवाही के बाबजूद ठेकेदार को फिर से किया गया भुगतान

मालूम हो कुछ समय पहले बीटी पेच के नाम से लाखों रुपये के अनर्गल भुगतान के बावजूद जिले के ही एक ठेकेदार ने लंबी राशि भुगतान लेने के बावजूद बीटी पेच काम मे भयंकर गड़बड़झाला किया गया जिसके शिकायत के बावजूद लगभग 28 लाख रुपये की राशि उस ठेकेदार के अन्य मद में डिपॉजिट राशि से वसूली गई मगर बाद में अपने आकाओं के रहमोकरम से वसुली राशि का भुगतान भी कर दिया गया इसके अलावा उस ठेकेदार के लिए नई निविदा में भाग लेने पर रोक लगाया जा रहा था तब स्थानीय ठेकेदार के रहमोकरम से उसी ठेकेदार को नया काम भी दिया गया।

वर्तमान में मुंगेली जिले के पीडब्ल्यूडी डिवीजन ऑफिस का बुरा हाल देखने को मिल रहा है कार्यपालन अभियंता के बेमन से कर्तव्यपरायणता पर नही रहने के कारण अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों में भी आपसी समन्वय नही देखा जा रहा है जिससे विभाग के बहुत से काम प्रभावित भी हो रहे हैं।

टीएल मीटिंग में इन अधिकारियों के दक्ष नही दिखता कोई और अधिकारी

मालूम हो जिला कलेक्टर की साप्ताहिक बैठकों में पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता शासकीय समय से 15 मिनिट पूर्व ही अपने विभागीय रिपोर्ट सहित मुस्तैद देखे जा सकते है जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही रहती है और जब ऐसे अधिकारी अपनी धूर्द्धता दिखाने टीएल बैठक में सफल हो जाते है तब फिर इनसे पॉवरफुल चमत्कारी पुरूष किसी विभाग में अगले टीएल बैठक के पहले तक कोई और नही रहता। बाकायदा टीएल बैठक में अपनी झांकी दिखाने के बाद ये अधिकारी अपनी आवश्यकता अनुसार ही डिवीजन ऑफिस अथवा मुख्यालय में पाए जाते है शेष समय मुख्यालय से बाहर ही रहते है।

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