भूमाफियाओं से कौन बचाएगा तालाबों की नगरी रतनपुर को?

संतोष सोनी चिट्टू

रतनपुर :तालाबों की नगरी रतनपुर में तालाब पटता नजर आ रहा है धार्मिक नगरी रतनपुर की प्रसिद्धि सबसे ज़्यादा तालाबों को लेकर ही चर्चित है। लेकिन अब यहां तालाब भी बेचे जा रहे हैं जबकि राजस्व नियमों के अनुसार तालाब की खरीदी- बिक्री अवैधानिक है।रतनपुर नगर के गांधीनगर स्थित एक बहुत ही पुराने हँसागर तालाब स्थिति है जिसे जमीन मालिक द्वारा पटवारी से सांठगांठ कर उक्त तालाब को बेच दिया गया है।


जिसका रकबा तीन एकड़ नौ डिसमिल है,जिसका खसरा नम्बर 607/1तथा 607/2 और 1.54 एकड़ तथा 1.55 एकड़, कुल 3.09एकड़ है,जिसका मूल खसरा क्रमांक 607 है, जो कि वर्तमान में तथा राजस्व नक्शा,रिकार्ड में तालाब चिन्हांकित है। इस तालाब का उपयोग आसपास के रहवासी व किसानों द्वारा निस्तारी हेतु किया जाता है।

उक्त तालाब को भूमाफियाओं के साथ रतनपुर के पटवारी के द्वारा सांठगांठ कर,कूटरचित दस्तावेज बनाकर उसे किसी अभिषेक व दो अन्य के नाम खरीदी बिक्री कराकर राजस्व अधिकारियों को अंधेरे में रखकर नामांतरण करा लिया गया है।


तालाब के दस्तावेजों में हेराफेरी की तो उजागर हो गई यदि जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही करती तो तालाब पटता नहीं आज पूरा तालाब मैदान में तब्दील हो चुकी है तहसीलदार राजेंद्र भारत का कहना है की हम कार्यवाही करेंगे ।


कार्यवाही के नाम पर बस लीपापोती

जैसे कि तहसीलदार ने कहा कि नियमों के अनुसार हम कार्यवाही करेंगे और जो दोषी होगा उसको सजा भी दी जाएगी।लेकिन अभी तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नही हुई है जिस्से माफियाओं के हौसले बुलंद होते जा रहे है।अगर कार्यवाही नही हुई तो ऐसे कई तालाब पटाते रहेंगे बिना डर भय के कौन बचा सकता है तालाबों की नगरी रतनपुर को यह भी एक प्रश्न चिन्ह है।

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