मुंगेली: देश के श्रमजीवियों समेत समाज के सभी तबकों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लम्बी लडाइयां लड़ी है। दुर्भाग्य यह है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार अब असहमति के हर आवाजों का दमन करना चाहती है। उसने एक काला आदेश निकाल कर रैलियों और प्रदर्शनों पर कडे प्रतिबन्ध और शर्तों को थोपने का काम किया है। ये बातें विधायक पुन्नूलाल मोहले ने पत्रकारों से बातचीत में कही।
जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में श्री मोहले ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए आगे कहा कि आप सभी अच्छी तरह जानते हैं कि कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के सपनों को छलने का काम किया है। उसने प्रदेश की सीधी-सच्ची जनता को दर्जनों लुभावने सपने दिखा कर, उनसे सैकड़ों वादे कर सत्ता हड़प ली। और अब जिस जनता ने उसे सत्ता सौंपी,उसी के साथ वह बर्बरता की सीमा लांघते हुए उनके लोकतांत्रिक अधिकार की नृशंस हत्या कर रही है।
ऐसे समय पर जब भाजपा बाबा साहेब डा. भीम राव अम्बेडकर जी की जयंती को ‘सामाजिक न्याय पखवाड़ा’ के रूप में मना रही है, तब छत्तीसगढ़ की जनता के साथ कांग्रेस असामाजिक, अलोकतांत्रिक अन्याय करने पर उतारू है। बाबा साहेब के संविधान द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या की कोशिश कर रही है कांग्रेस ।
भूपेश सरकार ने एक तुगलकी आदेश जारी कर प्रदेश भर के सभी निजी, सार्वजानिक, धार्मिक, राजनीतिक अन्य संगठनों द्वारा प्रस्तावित आयोजनों पर जिसमें भीड़ आती हो, उसे रोकने के लिए 19 बिंदुओं की शर्तें लगाई गयी हैं, और उसका कठोरता से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इन शर्तों का पूरी तरह पालन कर कोई भी बड़ा धार्मिक / राजनीतिक / सामाजिक आयोजन संभव ही नहीं है। अतः सीधे तौर पर सरकार यह चाहती है कि जन संगठनों के विरोध प्रदर्शनों को, असहमति की आवाज़ को, विपक्ष को, धार्मिक भावनाओं को अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचल दे। कांग्रेस का ऐसा करने का इतिहास भी रहा है, आपातकाल लगा कर उसने हमें जीने तक के अधिकार से वंचित कर दिया था।
ऐसे समय पर जब कांग्रेस सरकार द्वारा प्रदेश के किसान, युवाओं के साथ धोखा जब शिक्षक अभ्यर्थी, विद्या मितान, पुलिस अभ्यर्थी, बिजली कर्मचारी, कोरोना वारियर्स, संविदा कर्मी, आदिवासी, महिलायें, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं सभी अपनी मांगों को लेकर मैं आंदोलित हैं, जब प्रदर्शन के दौरान किसान अपनी जान दे रहे हैं जैसा नया रायपुर हुआ, युवा आत्महत्या कर रहे हैं, तब इन आक्रोशों को ख़त्म कर उन्हें न्याय देने के बदले, कांग्रेस सरकार उनकी जुबान बंद करने पर उतारू है। जबरा मारे और रोने भी न दे।
दूसरे राज्य की चुनाव में करोड़ों लुटाने वाले बघेल के पास अपने मतदाताओं के लिए केवल लाठी ही है। आयोजकों से हलफनामा लिया जाना सबसे आपत्तिजनक व असंवैधानिक है। आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस फिर उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। 22 अप्रेल को जारी आदेश के बिंदु 8,12,13,14,15,18 और 19 में ऐसे प्रावधान है जो संवैधानिक मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं। अपने राजनीतिक विरोधियों पर इस आदेश से नियंत्रण का प्रयास किया गया है।
अतः भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट तौर पर कांग्रेस सरकार को यह चेतावनी देती है कि 15 दिन के भीतर अपना यह काला आदेश वापस ले अन्यथा भाजपा लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता को साथ लेकर जेल भरो आंदोलन आदि के लिए बाध्य होगी जिसकी जिम्मेदार कांग्रेस सरकार की होगी।
इस अवसर पर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गिरीश शुक्ला, जिलाध्यक्ष शैलेश पाठक,जिला महामंत्री निश्चल गुप्ता,जिला मीडिया प्रभारी सुनील पाठक,कार्यालय मंत्री कोटू दादवानी, शंकर सिंह,नितेश भारद्वाज, उमाशंकर साहू,राजीव श्रीवास, मनोहर मोहले,अरविंद राजपूत उपस्थित रहे।
बोरे बासी हमारी संस्कृति,3 साल में मुख्यमंत्री को याद आया
विधायक पुन्नूलाल मोहले ने भूपेश बघेल के बोरे बासी खाने के आदेश के प्रश्न पर कहा कि बोरे बासी हमारी संस्कृति धरोहर व परम्परा है। यह कोई नई बात नहीं है। मुख्यमंत्री को 3 साल बाद ये ख्याल आया यह दुःखद है। शासन के आदेश का पालन करते हुए कुछ लोग चम्मच में बासी खाते दिखे तो कुछ अधिकारी पत्तल में बासी खाते भी दिखाई दिए हैं।