भव्य कलश यात्रा के साथ भागवत कथा प्रारंभ

लोरमी :त्रिपाठी पेट्रोल पंप के सामने श्रीमद्भागवत कथा आयोजन किया गया श्रीमद्भागवत कथा के लिए श्री राधे निकुंज आश्रम जजंगिरी भिलाई से पूज्य श्री नारायण महाराज जी का आगमन हुआ है जिनके श्रीमुख से मधुरमयी कथा दोपहर 3 बजे से 7 बजे तक आयोजक श्री पवन दास वैष्णव जी श्रीमद्भागवत कथा प्रथम दिवस भव्य कलश यात्रा लोरमी महामाया मंदिर पूजा अर्चना के बाद कथा के प्रथम दिवस

महाराज श्री ने कहा लोरमी की पावन भूमि जहाँ पर हम और आप सभी भगवान की पावन श्रीमद भागवत कथा जिस कथा के फल स्वरुप क्या प्राप्त नहीं हो सकता।

भागवत में लिखा है जिसके करोड़ो – करोड़ों जन्मो के पुण्य एकत्रित हो जाये वो व्यक्ति भागवत कथा सुनने का अधिकारी होता है। ऐसे भाग्यवान लोगो के भाग्य का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण में कहा गया है की जिसके करोड़ों जन्मो के पुण्य एकत्रित होते है वो कथा श्रवण का अधिकारी होता है।

महाराज श्री ने कहा कि जीवन के पाप हमारा मन कथा में लगने नहीं देते जब जीव के मनुष्य के पाप अधिक होते है तो मन कथा में नहीं लगता बुरे कार्यो में लगता है कई बार जाना भी चाहते है तो संसार -पकड़ लेता है और जिनके पाप मुक्त हो चुके होते है वो दूर से भी कथा पंडाल में पहुंच जाते है। आइये उन्ही पापों को काट ले भगवत नाम लेकर जिससे हमें कथा सुनने में कोई व्यवधान न पड़े।

महाराज श्री ने कहा कि भाग्यवान है वो लोग जिनको भगवान के गीत गाने का और सुनने का अवसर मिलता है। वही पुण्यात्मा है जो इस कलिकाल में निसदिन भगवान श्याम सुन्दर का चिंतन करता रहता है और जिसके मन का चिंतन कृष्ण का नहीं है उनकी चिंता कभी मिटी नहीं।

याद रखिये जिन्होंने कृष्ण का चिंतन नहीं किया जिन्होंने गोविन्द का चिंतन नहीं किया उनके जीवन भर कभी चिंता नहीं मिटी और जिन्होंने कृष्ण का चिंतन कर लिया उन्हें जीवन में कभी चिंता रही ही नहीं।


आहारनेस चिंतन जब आप करोगे तो तुम्हे तुम्हारी चिंता नहीं करनी पड़ेगी सर्वेश्वर श्रीकृष्ण तुम्हारी चिंता करेंगे।

पूज्य महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा की प्रारम्भ में यह की भागवत का महात्यम क्या है ? एक बार सनकादिक ऋषि और सूद जी महाराज विराजमान थे तो उन्होंने ये प्रश्न किया की कलियुग के लोगों का कल्याण कैसे होगा ? आप देखिये किसी भी पुराण में किसी और युग के लोगो की चिंता नहीं की पर कलयुग के लोगो के कल्याण की चिंता हर पुराण और वेद में की गई कारण क्या है क्योकि कलयुग का प्राणी अपने कल्याण के मार्ग को भूल कर केवल अपने मन की ही करता है जो उसके मन को भाये वह बस वही कार्य करता है। और फिर कलियुग के मानव की आयु कम है और शास्त्र ज्यादा है तो फिर एक कल्याण का मार्ग बताया भागवत कथा। श्रीमद भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीव का कल्याण हो जाता है ।

महाराज श्री ने कहा कि व्यास जी ने जब इस भगवत प्राप्ति का ग्रंथ लिखा, तब भागवत नाम दिया गया। बाद में इसे श्रीमद् भागवत नाम दिया गया। इस श्रीमद् शब्द के पीछे एक बड़ा मर्म छुपा हुआ है श्री यानी जब धन का अहंकार हो जाए तो भागवत सुन लो, अहंकार दूर हो जाएगा। इस सांसारिक जीवन में जो कुछ भी प्राप्त किये हो सब किराए के मकान की तरह है। खाली करना ही पड़ेगा।

व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। केवल सुनो ही नहीं बल्कि भागवत की मानों भी। सच्चा हिन्दू वही है जो कृष्ण की सुने और उसको माने , गीता की सुनो और उसकी मानों भी , माँ – बाप, गुरु की सुनो तो उनकी मानो भी तो आपके कर्म श्रेष्ठ होंगे और जब कर्म श्रेष्ठ होंगे तो आप को संसार की कोई भी वस्तु कभी दुखी नहीं कर पायेगी। और जब आप को संसार की किसी बात का फर्क पड़ना बंद हो जायेगा तो निश्चित ही आप वैराग्य की और अग्रसर हो जायेगे और तब ईश्वर को पाना सरल हो जायेगा।

श्रीमद् भागवत कथा का आयोजक श्री पवन दास वैष्णव श्रीमती विमला देवी वैष्णव मुख्य यजमान श्री जयंत वैष्णव चंद्रलता वैष्णव एवं वैष्णव कथा पंडाल में सैकड़ो की संख्या में भक्तों ने उपस्थिती दर्ज करवाई ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *