दुःख-दर्द दूर करने से ही होगा विकास-शंकराचार्य,80 वां प्राकट्य दिवस संपन्न……

भाटापारा : विकास का पैमाना केवल बुनियादी सुविधाएं ही नहीं है, आमजनों की तकलीफ समझनी होगी, दुख-दर्द दूर करना होगा तब ही सही मायनों में विकास को रेखांकित किया जा सकेगा। उक्त बातें जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कही।


अल्प प्रवास पर पहुंचे जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने वर्तमान राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि आज के राजनीतिज्ञों को राजनीति का मर्म समझना होगा,तब ही अपनी जिम्मेदारियों का ज्ञान हो पाएगा।

विकास की जो परिभाषा आज गढ़ी गई है उसके लिए स्थितियां भले ही अनुकूल मानी जा रही हों लेकिन सही मायनों में विकास तब ही हहोगा, जब लोगों की तकलीफों को हम पूरी तरह दूर कर पाएंगे।

रुद्राभिषेक में भागीदारी

जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के सानिध्य में मनाया जा रहा राष्ट्रोत्कर्ष पर्व की शुरुआत रुद्राभिषेक कार्यक्रम से शुरू हुई। पूजन के इस कार्यक्रम के संपन्न होने के बाद पादुका पूजन का आयोजन हुआ, जिसमें शहर के अलावा दूरदराज से आए भक्तों और श्रद्धालुओं ने भक्तिमय वातावरण में अपनी भागीदारी निभाई। इस मौके पर आमजनों के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी भक्तिभाव के साथ अपनी उपस्थिति दी।

80 वां प्राकट्य दिवस

रुद्राभिषेक और पादुका पूजन के पश्चात जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का 80 वां प्राकट्य दिवस की शुरुआत हुई।

बेहद सादगी के साथ आयोजित इस प्राकट्य दिवस के अंत में उपस्थित भक्तों के सामने सारगर्भित उद्बोधन को उन्होंने प्रवचन के शब्दों में व्यक्त किया। आयोजन का समापन प्रसादी के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति रही।

दुरुस्त यह व्यवस्था

जगतगुरु शंकराचार्य के पांच दिवसीय प्रवास के दौरान यातायात पुलिस की चुस्त व्यवस्था की हर जगह सराहना हो रही है। माहेश्वरी भवन से लेकर आयोजन स्थल गुरुकुल विद्यालय तक नियंत्रित आवाजाही को लेकर जैसी व्यवस्था की गई है उसे प्रशंसनीय माना रहा है। सफाई व्यवस्था जैसी बनी हुई है, उसमें और कसावट की जरूरत बताई जा रही।

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