रायपुर: भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के दिये बयानों से देश मे माहौल ठंडा होने का नाम ही नही ले रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं पारदीवाला की नूपुर शर्मा के ऊपर किये टिप्पणियों से पूरे देश मे न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गया है। दोनो न्यायमूर्ति पर अपने पद का दुरुपयोग करने एवं न्यायालय की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया जा रहा है।
वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ से धर्म संसद आयोजक पंडित नीलकंठ त्रिपाठी ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को पत्र लिखकर शिकायत की है कि जिस प्रकार से महिला याचिकाकर्ता नूपुर शर्मा की याचिका की जांच किये बिना ही नूपुर शर्मा पर दोनों न्यायमूर्ति द्वारा गंभीर आरोप लगाया गया है एवं उन्हें बिना शर्त टीवी में आकर माफी मांगने को कहा गया इससे न्यायालय की छवि धूमिल हुई है। इस गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी को संज्ञान में लेकर दोषियों के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही करने की मांग की है।
नीलकंठ त्रिपाठी ने कहा कि जिस प्रकार से दोनों जजो द्वारा नूपुर शर्मा की याचिका की सुनवाई किये बिना ही उस पर आरोप लगा देना निंदनीय है। नूपुर शर्मा को देश मे अकेले ही देश का माहौल खराब करने का जिम्मेदार ठहरा दिया गया इससे न्यायालय की न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास संदेह के घेरे में आ गई है। जबकि पाकिस्तान में बैठे इन्ही के मौलवियों द्वारा निंदा की गई है कि हमारे समुदाय के नेता द्वारा ही उसे बोलने के लिए उकसाया गया गई तो फिर देश मे जो भी माहौल खराब हुआ है उसका जिम्मेदार नूपुर शर्मा कैसे हो गई। मैं सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिख कर इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच करके दोशियों के ऊपर उचित कार्यवाही करने की मांग किया हु।