रेवड़ी की तरह बांट रही चोरी के खुलासे में मुंगेली पुलिस सम्मान, स्थानीय मीडिया के लोग नही है हकदार?

• स्थानीय पत्रकार पुलिस के अहम खुलासे या पड़ताल में क्या नही रहे सहयोगी?
• क्या बिना स्थानीय मीडिया के पुलिस कर सकती है कोई पड़ताल?
• कागज के टुकड़ों से हुए सम्मान में भी पुलिस की नजर में नही दिखे काबिल पत्रकार?

मुंगेली। वैसे कहां जाता है कि किसी भी अपराध अथवा विवेचना, जांच में पुलिस मीडिया की मदद से अंजाम तक पहुंचती है जिसके अनेक उदाहरण देखने को मिले भी है मगर हाल ही में मुंगेली शहर के भीतर रिहायशी इलाके में बेखौफ हुए चोरी में पुलिस की जांच प्रारंभ से ही अनेक सवालों में घिरती दिख रही थी मगर जैसे भी हो पुलिस इस चोरी की घटना पर चोर तक पहुंच एक बड़ी कार्यवाही बता रही है निश्चित रूप से पुलिस की इस कार्यवाही में मुंगेली जिले के मीडिया सहयोग से मामले के पटाक्षेप में मदद मिली मगर पुलिस जब उत्साहवर्धन के लिए एक कागज के टुकड़ों में बाकायदा जिले के कप्तान के हाथों सम्मान कराई तब इन तहकीकात अथवा सहयोगी के रूप में पुलिस को स्थानीय मीडिया की कोई भूमिका नजर नही आई। लेकिन पूरे मामले में यदि विवेचना अथवा जांच की पुनः समीक्षा हो तो शायद इतनी बड़ी चोरी को इस ढंग से पटाक्षेप करने में और भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

आपकी जानकारी में बता दें जब सुनार पारा के पालिया निवास में जिस दिन यह चोरी की घटना सीसीटीवी और फुटेज में देखी गई तब पूरा शहर इस चोरी के वारदात से दहशत में रहा उसके इस चोरी की घटना के बाद पुलिस व कारोबारी चोरी के तादाद बताने में किनारा भी करते रहे। बाद में जब चोर के पकड़े जाने पर खुलासा पुलिस की तरफ से पूरी चोरी के माल बरामदगी की बात कही गई। जिससे भी चोरी के तादाद व बरामदगी में संशय बना हुआ है। हालांकि पुलिस ने अपने तरफ से ये मामला का पटाक्षेप कर कार्यवाही पूर्ण होना मान रही है मगर शहर भीतर चोरी की घटना के समय जिस अंदाज में यह घटना हुई उस दौरान चोरी के अलावा कोई और बड़ी वारदात हो सकती थी पुलिस अपने सतर्कता के लिहाज से क्या रणनीति बनाई जिससे ऐसे घटना की पुनरावृत्ति न हो?

किसी भी बड़े खुलासे में प्रायः यह देखा गया कि पुलिस किसी भी खुलासे में टीम प्रमुख का सम्मान करती है मगर पता नहीं चोरी की घटना के खुलासे के बाद अलग अलग ढंग से बाहरी लोगों को बुलाकर रेवड़ी की तरह सम्मान बांटना और स्थानीय मीडिया की उपेक्षा करने से मुंगेली के मीडिया जगत में आक्रोश देखा जा रहा है।

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