बस्तर के 521 गांवों में ढिबरी युग : दावे और वादे तो हर घर उजियारा का, लेकिन हकीकत कोसों दूर 

जगदलपुर। आज कोई भी व्यक्ति बिजली के बगैर जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकता। लेकिन बस्तर संभाग के सात जिलों के लगभग 521 गांव ऐसे हैं जहां लोग आज भी अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। ऐसे गांवों में आजादी के बाद से आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। आजादी के 77 साल बाद भी यहां के ग्रामीण बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी इनकी सुनने वाला कोई नहीं है। 

बिजली नहीं होने की वजह से बच्चों को पढ़ाई की समस्या होती है। वहीं किसान भी खेती के लिए पूरी तरह से मौसम पर ही निर्भर हैं। इतना ही नहीं, ऐसे गांव घने जंगल में ग्रामीणों को जंगली जानवरों का भी मुकाबला करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, बिजली ना होने की वजह से रात के समय कई बार लोग सर्पदंश का शिकार हो जाते हैं। विद्युत कंपनी के अनुसार ऐसे गांव हैं जो पहुंचविहीन दुर्गम सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने से अब तक सड़क नहीं बन सकी यही कारण है कि, बिजली नहीं पहुंच सकी।

इन 3 जिलों में सबसे ज्यादा गांव अंधकार में

बस्तर जिले में 4, दंतेवाड़ा में 7, बीजापुर में 203, कांकेर में 26, कोंडागांव में 4 और नारायणपुर जिले में 145 गांव हैं जहां बिजली नहीं है। इसमें से बीजापुर जिले के फरसनार, करपे, गर्तुल, अर्रेपल्ली, गुंडापुरी, गुंडनगुर, करकवाड़ा, चिपनपल्ली, जारागुड़ा, छोटेकाकलेर, चेरपल्ली, पिलूर, अन्नापुर, साफीमरका, भंडारपाल, नारायणपुर जिले के हिक्कोनार, टिरकानार, तुरुसमेटा, होड़नार, सुर्रेवाही, अंजरेल, टेमरूगांव, बोरानिरपी, कोडोनार गांव आदि शामिल हैं।

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