छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने न्यायालय आदेश की अवहेलना के एक गंभीर मामले में डी.आई.जी.पी. प्रशासन पारूल माथुर एवं एस.पी. जांजगीर विजय पाण्डेय को अवमानना नोटिस जारी कर तत्काल जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह नोटिस, वार्ड क्रमांक 16, पामगढ़ निवासी विक्की भारती द्वारा दायर अवमानना याचिका (Cont. No. 1108/2025) के आधार पर जारी किया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं प्रिया अग्रवाल ने अदालत में यह तथ्य प्रस्तुत किया कि विक्की भारती के पिता की मृत्यु अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पश्चात हुई थी, किंतु राज्य शासन द्वारा उक्त सेवानिवृत्ति आदेश को निरस्त कर दिया गया था। इस निर्णय के पश्चात, उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को अनुकम्पा नियुक्ति का पात्र माना और इसके लिए 90 दिवस की समयावधि में कार्रवाई करने का आदेश पारित किया।
हालांकि, न्यायालय के आदेश के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, 90 दिवस से अधिक समय बीत जाने के बाद भी याचिकाकर्ता को पुलिस विभाग में नियुक्ति प्रदान नहीं की गई। इससे क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता ने न्यायालय की अवमानना का मामला दर्ज कराया।
अधिवक्ताओं ने न्यायालय में यह तर्क रखा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा हाईकोर्ट के आदेशों का समय पर पालन न करने की प्रवृत्ति चिंताजनक है, जिससे हाईकोर्ट में लंबित अवमानना याचिकाओं की संख्या में भारी वृद्धि हो रही है। जुलाई 2025 तक 1,149 अवमानना याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, जो न्यायालय के कीमती समय को बाधित कर रही हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने मांग की है कि न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 के अंतर्गत डीआईजीपी पारूल माथुर एवं एसपी विजय पाण्डेय के विरुद्ध छह माह कारावास एवं ₹2,000 के जुर्माने अथवा दोनों का कठोर दंडादेश पारित किया जाए।
न्यायालय ने इस याचिका को गंभीर मानते हुए उक्त अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए उनसे तत्काल लिखित उत्तर प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।