2 साल में सहायक आयुक्त को 3 बार हटाने के बावजूद नहीं दिया जा रहा प्रभार…

रायपुर/गरियाबंद। जिले बेशर्मी एवं निर्लज्जता की हद तब पार होती देखी जा रही है जब प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन कुमार भगत को दो वर्षों के भीतर अनियमितता, भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतों के मद्देनजर तीन बार स्थानान्तरण आदेश के बावजूद अब तक पद पर बने हुए हैं।

प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन कुमार भगत के विरुद्ध जिले में अनेकों बार शिकायत, धरना,आंदोलनों के बावजूद कलेक्टर भगवान सिंह उईके स्वयं अपने अधोहस्ताक्षर से स्थानांतरण आदेश जारी करने के बावजूद मूकदर्शक मुद्रा में नजर आ रहे हैं। स्वयं कलेक्टर के प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन भगत के लिए इस रुख को देखते हुए अन्य विभागों में पदस्थ काबिल अफसर हतोत्साहित हो रहे हैं।

बता दें गरियाबंद जिले में पदस्थ अपर कलेक्टर नवीन कुमार भगत पूर्व में ज्वाइंट कलेक्टर पदस्थ होने के बाद अपनी पारी की शुरुआत में सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार ले लिया। जिसके बाद जीर्णोद्धार,रखरखाव के नाम पर करोड़ों के निविदा इस विभाग के अंतर्गत हुए।

हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस सारी निविदा में अधिकांश ठेकेदार बाहर के उतरे जो आदिवासी बाहुल्य जिले में पहली बार दस्तक दिए। लोकल ठेकेदारों को कभी विभाग में तवज्जो नहीं मिला। इस विभाग में अनाप शनाप हुए टेंडर में बंदरबांट के अलावा विभागीय मूलभूत काम नगण्य रहे। जिसके कारण समय समय पर सहायक आयुक्त की करतूतों को उजागर करने की शिकायत,धरना आंदोलन हुआ।

राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए। जगदलपुर में पदस्थ राजेन्द्र सिंह का स्थानान्तरण इस जिले के सहायक आयुक्त के लिए किया मगर उन्हें बिना प्रभार मिले ही जिले से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके पूर्व पदस्थ कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने जब जिला स्तर पर सहायक आयुक्त नवीन कुमार भगत को हटा विभागीय अधीक्षक को प्रभार दिया तब भी प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन भगत पद पर बने रहे।

वर्तमान कलेक्टर ने भी अपने अधोहस्ताक्षर से सहायक आयुक्त को बदलते हुए पुनः अधीक्षक को प्रभार के लिए आदेश जारी करने के महीनों बाद भी सहायक आयुक्त का प्रभार ज्वाइंट से अपर कलेक्टर होने के बावजूद नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में अब विभाग के तरफ बिना प्रभार दिए कक्ष बदल आदिवासी विभाग के कामकाज को अपने ढर्रे से ही किया जा रहा है जिसके चलते नियमित विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

विभागीय पदस्थ कर्मचारी इस विभाग के काम के लिए फाइल लिए भटक रहे मगर विभाग का कोई काम नहीं हो रहा है। ऐसे में क्या कलेक्टर को अपने स्वयं द्वारा जारी आदेश के बावजूद प्रभारी आयुक्त नवीन भगत को सुनियोजित ढंग से पद में बनाए रखना कोई साजिश तो नहीं? बहरहाल गरियाबंद जिले के आदिवासी विभाग के 3 वर्षों के अनियमित और भर्राशाही कार्यकाल की जांच के लिए शिकायत राज्य स्तर के अधिकारियों को की जा रही है।

इसके अलावा इस विभाग में व्याप्त भयंकर भ्रष्टाचार की शिकायत प्रधानमंत्री दफ्तर में होने के बाद पीएमओ दिल्ली से भी जांच कार्यवाही के लिए आदेशित किया गया है मगर वर्तमान जिला प्रशासन के मौन,मूकदर्शक मुद्रा को देखते हुए अब राज्य स्तर से किसी बड़ी कार्यवाही का इंतजार है।

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