रायपुर। पिछली भूपेश सरकार के समय जो बड़े भ्रष्टाचार और उसमें लिप्त अधिकारियों की लिस्टिंग,कार्यवाही विष्णुदेव साय के सुशासन में ताबड़तोड़ जारी है। हाल में शराब और डीएमएफ घोटाले के लिए चुन चुन कर कार्यवाही कर जेल में डाले जा रहे हैं। ऐसा ही बड़ा मामला गरियाबंद जिले में 2023 से अब तक एक विभाग के संदिग्ध एवं मनमाने पूर्ण करोड़ों के खर्च को लेकर एसीबी एवं अन्य जांच समितियां इन दिनों गरियाबंद में सक्रिय है।
जिले के इस विभाग में विगत 3 वर्षों में करोड़ों के निविदा जारी कर बंदरबांट की जाती रही है। जिसको लेकर बड़ी शिकायतें राज्य के विष्णुदेव शासन में एवं प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई।
अब दोनों ही जगह से अलग अलग टीम इसकी गोपनीय जांच और कार्यवाही के मूड में नजर आ रही है। इस विभाग के प्रभारी अधिकारी के रूप में अब तक पदस्थ अधिकारी को घेरने हर संभव कोशिश जारी है।
मालूम हो आदिवासी बाहुल्य गरियाबंद जिले में 2023–24 से पदस्थ एक विभाग के प्रभारी अधिकारी जिला प्रशासन को अपना रुतबा बताकर प्रभार रखने और दबाव पूर्ण निर्णय के लिए बाध्य रखा गया। जब भी सम्बंधित प्रभारी अधिकारी पर बड़ी कार्यवाही की भनक लगी तब राज्य शासन के ओहदेदार लोगों से सिफारिश कराकर अपना बचाव करने लगे रहे।
भूपेश सरकार के जाने के बाद संबंधित अधिकारी ने नई विष्णुदेव सरकार में अब गरियाबंद जिले के कुछ सत्ता शासित दल के लोगों को अपने प्रभाव और आर्थिक लाभ के झांसे में लेकर शामिल रख निविदा के काम और बाकी बंदरबांट में शामिल कर लिया गया। इस पूरे मामले में अब तक 3 वर्षों में जिले के सभी ब्लॉक से जागरूक संगठनों,और प्रभावित लोगों द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष धरना, आंदोलन और शिकायत की जाती रही मगर हर शिकायत को दबाकर सम्बंधित अधिकारी के बचाव में जिला प्रशासन जुटा हुआ है।
अब ऐसे में जांच और बड़ी कार्यवाही के लिए शिकायतकर्ताओं ने एसीबी एवं ईओडब्ल्यू की टीम के समक्ष शिकायत कर कार्यवाही कराने की फिराक में नजर आ रहे हैं।
यह भी विचारणीय है कि करोड़ों के टेंडर और काम के लिए सम्बन्धित विभाग अब तेजी से कागजों में खानापूर्ति कर इस जिले से मुक्त होकर अन्यत्र स्थानान्तरण के फिराक में इधर उधर जुगाड में लगा हुआ है।
अब देखना यह है कि 3 वर्षों के कार्यकाल में बड़ी कार्यवाही होती है या गरियाबंद जिले के करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के बाद जिले से बाहर भागने में संबंधित अधिकारी सफल होता है।