मुंगेली व्यापार मेला के चौथे दिन सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। देर रात तक चले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को शब्दों और भावनाओं की अनोखी दुनिया से रूबरू कराया।

कवि सम्मेलन की शुरुआत कवयित्री विभा सिंह ने मां वीणापाणी की वंदना से की। लोरमी के कवि अक्षत शर्मा ने राष्ट्रभाषा हिंदी और प्रभु श्रीराम पर अपनी मनभावन कविताओं से खूब तालियां बटोरीं। रायपुर के गीतकार भरत द्विवेदी ने अपने छत्तीसगढ़ी गीत ‘अटकन बटकन’ से श्रोताओं को आनंदित किया, वहीं पिता पर आधारित उनकी कविता ने लोगों को भावविभोर कर दिया।

कवर्धा के कवि अभिषेक पांडे ने अपने मुक्तकों और गीतों से राष्ट्रीयता की भावना को उत्तेजित किया। बनारस से आई कवयित्री विभा सिंह ने अपने श्रृंगार रस से भरे मुक्तकों और कोमल कंठ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुंबई से पधारे विख्यात हास्य कवि चेतन चर्चित ने अपनी लाफ्टर कविताओं से देर रात तक हॉल में ठहाके गूंजा दिए। धार के लोकप्रिय कवि जानी बैरागी ने सनातन, संस्कृति और भारत के विश्व गुरु बनने जैसे विषयों पर अपनी प्रभावशाली कविताओं से कार्यक्रम को शिखर पर पहुंचा दिया।

कवि सम्मेलन का कुशल संचालन मुंगेली के युवा एवं लोकप्रिय कवि देवेन्द्र परिहार ने किया, जिनकी शैली की श्रोताओं ने विशेष प्रशंसा की।