मुंगेली। लगभग जिला निर्माण के बाद इन 13 वर्षों में कुकुरमुत्ते की तरह अपराधों में भी इजाफा हुआ हालांकि बहुत हद तक पुलिस ने अपनी कर्तव्यपारायणता से अपराधों में अंकुश लगाने में सफल रही मगर बहुत से ऐसे अपराध हुए जिनमें शासकीय संपत्ति को क्षति पहुंचाने,कर चोरी,जीएसटी चोरी और सबसे बड़ी अहम बात भोले भाले लोगों को सब्जबाग दिखाकर अथवा झांसे में लेकर बिना डायवर्सन,बिना टीएनसी की औपचारिकताओं से धड़ल्ले से बेचा गया।
इन सब में सबसे अहम बात जमीन अफरा तफरी,धोखाधड़ी या अवैध प्लाट कटुआ गिरोह की सक्रियता के बावजूद सीधे पुलिस ने राजस्व टीम के साथ अथवा आयकर या जीएसटी ने संयुक्त रूप से आज तक कोई अपराध पंजीबद्ध नहीं किया जिसके बाद लगभग शहर भीतर ही एक दर्जन से अधिक अवैध कालोनाइजरों के ऑफिस से लोगों को झांसे में लेकर चुना लगाने का अपराधजन्य कृत्य होते रहा। बावजूद जिम्मेदार एसडीएम दफ्तर हर समय कार्यवाही की दुहाई देते रहा और बाकायदा उनके खसरा नंबर सहित समय समय पर सुनियोजित ढंग से चिन्हांकित कर खरीदी बिक्री में रजिस्ट्री दफ्तर में रोक भी लगाई गई। मगर इन सबके बावजूद एक अहम सवाल यह भी है कि क्या कभी राजस्व विभाग के अमले ने एसडीएम के नेतृत्व में कोई अवैध कालोनाईजरो के सीसी रोड,और अन्य निर्माण को अवैध काल कालोनी की कार्यवाही के बाद नेस्तनाबूत किया? जिसका जवाब है कभी नहीं। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि अपराधजन्य कृत्य में राजस्व अमले ने समय समय पर कार्यवाही का ढकोसला किया और कालोनाइजरों के नापाक मंसूबों पर सफलता मिलने के बाद एसडीएम के साथ सांठगांठ कर कार्यवाही के नाम मीडिया फोकस कर रोक लगा दी गई।
विचारणीय तथ्य यह भी है कि एसडीएम दफ्तर में बतौर एसडीएम कोई भी पदस्थ होने के बाद दो से तीन वर्ष रहना होता है फिर ट्रांसफर के बाद अन्यत्र रवाना हो लेते है। इन सब एसडीएम दफ्तरों की बनावटी कार्यवाहियों के बाद जब पिछली भूपेश सरकार गई तब भी नई सरकार में जिला प्रशासन का प्रबंधन रिफ्रेश हुआ और ना जाने इन 13 वर्षों में एक दर्जन से अधिक एसडीएम आए और ट्रांसफर,परिवीक्षा पूर्ण अथवा सेवानिवृत्ति में चलता हो गए मगर सबके के कार्यवाही का सिस्टम इन अवैध कालोनाइजरों के लिए एक जैसा ही रहा जहां पर आज भी 13 वर्षों में अनेक खसरों में रोक लगा दिए जाने के बावजूद इसी एडीएम के दफ्तर और पदस्थ रहे एसडीएम द्वारा बकायदा अवैध कालोनाईजरो पर की कार्यवाही वाले खसरों का भी डायवर्सन प्रकरण निपटाया जाता रहा और उन्हें व्यापवर्तित भूमि के प्रमाण पत्र भी दिए जाते रहे । इन 13 वर्षों में एक दर्जन से अधिक एसडीएम के इसी ढर्रे में काम करने के बावजूद आज तक किसी भी एसडीएम को जिला प्रशासन के जिम्मेदार अफसरों के तरफ से नोटिस भी ना देना सबकी मिलीभगत होने को स्वमेव प्रमाणित कर रहा है। अब डायवर्सन के प्रमाण पत्र उपलब्ध होने के बावजूद छोटे छोटे टुकड़ों में आशियाना बनाने का सपना संजोए अनगिनत लोगों को आज भी म्युनिसिपल के भवन अनुज्ञा की तर्कसंगत दिक्कत के सामने असहाय और बेबस ठगा जैसा महसूस हो रहा है बावजूद विक्रेता के रजिस्ट्री दावे और एसडीएम के डायवर्सन सर्टिफिकेट देने के बाद बेबस,असहाय खरीददार सिर्फ अपने को मौन,मूकदर्शक मुद्रा में ठगा महसूस कर रहा है बावजूद पुलिस अब ऐसे लोगों को कोई मदद नहीं कर पा रही है क्योंकि तकनीकी रूप से भू स्वामी भी बन गए और उनके भू खंडों का डायवर्सन भी हो गया इस चक्कर में बेचारा खरीददार अपनी गाढ़ी कमाई से खरीदे प्लाट में एक ईंट भी नहीं रख पा रहा है।
वर्षों से सुनियोजित ढंग से प्लाट कटुआ गिरोहों अथवा भू माफियाओं या फिर अवैध कालोनाईजरो के चंगुल में फंसने वाले अभी भी रोज मकड़जाल में फंस रहे है जिन्हें तरह तरह के सब्जबाग दिखाकर ठगा जा रहा है। क्या जिला प्रशासन अथवा पुलिस या आयकर या फिर जीएसटी की टीम इन अवैध कालोनाइजरों के दफ्तरों में कार्यवाही कर संबंधित षड़यंत्र में लिप्त लोगों पर कार्यवाही नहीं कर सकती है? क्या राजस्व चोरी,अवैध कालोनी बसाने, लोगों को गुमराह कर धोखाधड़ी करने जैसे गंभीर प्रवृत्ति के अपराध होने के बावजूद मुकदमा दर्ज कर इनका जुलूस नहीं निकाला जाना चाहिए?जिनके ऑफिस मुख्य मार्ग में सड़क ऊपर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। मगर एक जमीनी हकीकत पूरे मकड़जाल में यही समझ आ रहा है जब एसडीएम दफ्तर की ही औपचारिक कार्यवाही केवल मीडिया फोकस कर लोगों को गुमराह करने की गई तब ये सभी प्लाट कटुआ गिरोहों अथवा भू माफियाओं द्वारा आकर्षक सब्जबाग दिखाकर अवैध प्लाटिंग का खेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
सत्ता शासित विधायक होने के बावजूद केबिनेट में लिए निर्णय की अवहेलना दुर्भाग्यपूर्ण….
यह भी बता दें जबसे विष्णुदेव की सरकार आई अवैध कालोनाईजरो पर अंकुश लगाने एवं राजस्व वृद्धि के उद्देश्य से 5 डीसमिल या उससे ऊपर के रकबे के विक्रय के लिए फ्री कर दिया गया जिसमें भू खंड का स्वभाव जैसा भी हो,इसके अलावा 5 डीसमिल से छोटे टुकड़ों की रजिस्ट्रियां रोक दी गई मगर सरकार के इस निर्णय के एक वर्ष गुजर जाने के बावजूद मुंगेली जिला प्रशासन सभी रजिस्ट्रियां पर ही रोक लगा दी है ऐसा सब रजिस्ट्रार द्वारा किसी लिखित आदेश के बिना मौखिक मना होने का हवाला दिया जाता है। नतीजतन पूरे वर्ष 5 डीसमिल की रजिस्ट्रियां नहीं हो पाई और बेबस और लाचार लोग दर दर अपने आपातकाल के लिए विक्रय कर रहे भूखंड रजिस्ट्री नहीं होने के कारण आज तक चक्कर काट रहे मगर जायज रजिस्ट्रियों के लिए भी जिला प्रशासन अथवा स्वयं पंजीयक दफ्तर में राजस्व की बड़ी हानि होने के बावजूद पहल,पत्राचार नहीं किया गया।चर्चा में यह भी बात सुनने की मिलती रही है कि केबिनेट के निर्णय अनुसार मुंगेली जिले अंतर्गत मुंगेली विकासखंड के अलावा शेष विकासखंड के पंजीयक कार्यालय में 5 डीसमिल की रजिस्ट्रियां हो रही है मगर विधायक पुन्नूलाल मोहले के विधानसभा क्षेत्र के मुंगेली विकासखंड में 5 डीसमिल की रजिस्ट्रियां एक वर्षों से बाधित रखी गई। इन सबके बावजूद बजट वाले गंभीर विधानसभा के सत्र में पर केबिनेट के निर्णय के हवाले से 5 डीसमिल रजिस्ट्रियां चालू करने का मुद्दा उठाने में कोई रुचि स्थानीय विधायक पुन्नूलाल मोहले ने नहीं दिखाई।