- बाकायदा शिकायत,बयान और उसके बाद भी एफआईआर नहीं उल्टे आरोपी पक्ष को दिया जा रहा संरक्षण
- बतौर साक्ष्य ऑडियो रिकॉर्ड है मौजूद अब वह भी जगह जगह हो रहे वायरल
- बयान दर्ज किए सब इंस्पेक्टर भी अन्य मामले में हो चुके है निलम्बित
- पत्रकारिता या ब्लैकमेलिंग का धंधा?
रायपुर। लगभग 6 महीने के दरमियान छत्तीसगढ़ राज्य के गरियाबंद जिले में आधा दर्जन ऐसी घटनाएं हुई है जिससे स्वयं जिला प्रशासन द्वारा राज्य सरकार की किरकिरी कराने कोई कसर नहीं छोड़ी है। देवभोग अश्लील नग्न नृत्य का मामला हो या आदिवासी बालक छात्रावास में इलाज के अभाव में छात्र की मौत या फिर पवित्र राजिम कुंभ में विधायक जैसे ओहदे के परिजनों को अल्पाहार,स्वल्पाहार तो दूर पीने के लिए पानी और बैठने के लिए कुर्सी नसीब नहीं होना जिला प्रशासन के लापरवाही को स्वमेव स्पष्ट कर चुका है
इसके अलावा गरियाबंद में ही जिला प्रशासन की घोर उदासीनता कहे जिसके चलते भी और पुलिस का भी अपना अलग कार्य करने के भी ढंग से लोग अब भय में है । राज्य सरकार के समक्ष गरियाबंद जिले के समस्त गतिविधियों की रिपोर्ट पहुंची है मगर कोई बड़ी कार्यवाही इतनी बड़ी बड़ी घटनाएं होने के बावजडू नहीं देखने को मिली है।
वर्तमान में लंबे समय से कुछ मीडिया के इलेक्ट्रॉनिक चैनलों की माइक आईडी या किसी अखबार के परिचय पत्र के सहारे ठेकेदार, अधिकारी,और बाहर ले आए लोगों को मोबाइल में पुलिसिया अंदाज में लगातार पैसे की उगाही के लिए काल जा रहे है ताजातरीन मामला एक कथित पत्रकार ने एक ठेकेदार को अपने काम के एवज में माइनिंग और अन्य कानून की नसीहत देते हुए ऑडियो में स्पष्ट पैसे की मांग करते नजर नहीं आए मगर उनके बातचीत के लहजे में गरियाबंद का अधिकांश ठेकेदार दहशत का जीवन गुजारने मजबूर है। आखिरकार कौन है ये हिमांशु…? जिसके नाम लिखित शिकायत बयान गवाही के बावजूद पुलिस के एफआईआर करने में हाथ पैर फूल रहे है।
मालूम हो कि पत्रकारिता जैसे सम्मानजनक पेशे की आड़ में कुछ लोग इसे अवैध वसूली और ब्लैकमेलिंग का जरिया बना रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। आजकल एक एंड्रॉयड मोबाइल और एक वेबसाइट के रजिस्ट्रेशन के बाद बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन और मान्यता के खुद को पत्रकार बताकर आम लोगों को डराना, पैसा मांगना और मना करने पर झूठे केस में फसाना और बदनाम करने की हरकत करना आम बात हो गई है। सोशल मीडिया में बदनाम करने का डर दिखाकर लोगों को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। ऐसी बात भी नहीं कि मीडिया के आड़ में ऐसे तथाकथित लोगों को पुलिस का संरक्षण ना मिल रहा हो। पुलिस का संरक्षण रहने पर ही ना ही ब्लैकमेलर के विरुद्ध लिखित शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो रही और लोग भय के माहौल में जीवन जीने मजबूर है।
गरियाबंद के इरफान खान जिन्होंने अपनी पीड़ा पहले पुलिस को बताई लिखित में शिकायत दी कि हिमांशु नाम के एक ब्लैकमेलर ने मुझे फोन किया। पहले 50 हजार रुपए देने की बात की, फिर धमकी दी विभाग के हिसाब से देख लेंगे। फिर मिट्टी को मुरूम बताकर तहसीलदार से कार्रवाई कर दी। मतलब एक भय बनकर वसूली बाज व्यक्ति की पहुंच सिर्फ पुलिस तक ही नहीं बल्कि खनिज विभाग,एसडीएम, तहसीलदार सब कब्जे में रखना बता रहा है।
कहीं कोई मकान बना रहा हो, कहीं रेत का काम हो, बस पैसे मांगने पहुंच जाते हैं और शुरू हो जाता है चंदा और सेटिंग का खेल। असली में ये पत्रकार नहीं, सिस्टम का दुरुपयोग करने वाले ब्लैकमेलर हैं जो प्रशासन को अपनी कठपुतली समझते हैं।
ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि असली और निष्पक्ष पत्रकारों की छवि खराब न हो और आम जनता को इस तरह के ब्लैकमेलर लोगों से राहत मिल सके।