रायपुर। बिलासपुर संभाग के मुंगेली जिले के कलेक्टर कुंदन कुमार को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में उन पर छत्तीसगढ़ी भाषा के अपमान का गंभीर आरोप लगाया गया है।
यह पोस्ट राहुल वर्मा नाम के एक फेसबुक यूज़र द्वारा साझा की गई है, जिसके बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
वायरल पोस्ट के अनुसार, कलेक्टर कुंदन कुमार, जिन्हें वर्ष 2014 बैच का आईएएस अधिकारी बताया जा रहा है, ने छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान में दिए गए एक आवेदन को कथित तौर पर पकड़कर फेंक दिया। इस आरोप ने स्थानीय स्तर पर भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़े भावनात्मक मुद्दे को हवा दे दी है।
पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि कलेक्टर मूल रूप से बिहार के निवासी हैं और इसी वजह से उन्हें छत्तीसगढ़ी भाषा से नफरत है। हालांकि, इन सभी आरोपों की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, और प्रशासन की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूज़र्स प्रशासनिक व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं, तो वहीं कुछ टिप्पणियों में क्षेत्रीय और बाहरी विवाद को भी बढ़ावा देने की कोशिश दिखाई दे रही है। एक यूज़र द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ होगा, बल्कि स्थानीय भाषा और संस्कृति के सम्मान के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। वहीं, बिना पुष्टि के ऐसी पोस्ट का वायरल होना सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बन सकता है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में लंबे समय से छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान और उसके उपयोग को बढ़ाने की मांग उठती रही है। ऐसे में यह विवाद भाषा और पहचान की राजनीति को फिर से चर्चा में ला सकता है।
इस पूरे मामले को लेकर अब स्थानीय संगठनों और नागरिकों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होनी चाहिए, और अगर आरोप निराधार हैं, तो भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर भी सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।