खनिज के लिए रॉयल्टी के निर्धारण पर लंबे समय से है भ्रम।
सचिव स्तर की बैठक में खनिज विभाग के अफसर रहे नदारत।
मिट्टी को खनिज संसाधन के रूप में PWD कर रही नजर अंदाज।
रायपुर। 23 मई को लोक निर्माण विभाग नव पदस्थ सचिव मुकेश बंसल ने उप मुख्यमंत्री सह लोक निर्माण मंत्री के गृह जिले एवं विधानसभा क्षेत्र मुंगेली में हो रहे कामों की समीक्षा बैठक की। बैठक में चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने सहित वो तमाम निर्देश दिए गए जिनमें विभाग को आवश्यक रूप से सतर्कता रखनी चाहिए मगर लोक निर्माण विभाग के कामों में मिट्टी को विभाग खनिज संसाधन के रूप में ना मानने और अपने मूल्यांकन में मिट्टी की रॉयल्टी की बाध्यता नहीं रखने का मामला ठंडे बस्ते में रहा जबकि इस सचिव स्तर की बैठक में लोक निर्माण विभाग,राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी,जिले के कलेक्टर सहित तमाम आला अफसर मौजूद रहे मगर रॉयल्टी चोरी जैसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभाग के मुद्दे को खनिज अधिकारी की गैर मौजूदगी चर्चा का विषय रही।
मालूम हो लंबे समय से लोक निर्माण विभाग में रॉयल्टी के लिए शुल्क का निर्धारण किया गया मगर महीनों बाद भी पूरे राज्य में किसी आदेश के अंतर्गत उस रॉयल्टी का पालन नहीं कराया जा सका जिसका खामियाजा यह देखने को मिला कि अलग अलग जिलों या लोक निर्माण विभाग के डिवीजन में अपने मनमाफिक ढंग से रॉयल्टी के लिए मापदंड रखी गई जिससे खनिज विभाग के रॉयल्टी चोरी करने खुली छूट मिलने जैसा हो गया। आज पूरे प्रदेश में लोक निर्माण विभाग में खनिज रॉयल्टी के लिए कोई रेट निर्धारण आधिकारिक आदेश नहीं जारी होने के कारण खानापूर्ति ही की जा रही है जिससे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मातहत होने वाले खनिज विभाग को करोड़ो रुपये राजस्व का प्रकृतिक रूप से नुकसान हो रहा है।
आश्चर्य जनक बात मुंगेली में यह देखने को मिली कि लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल की मौजूदगी के हुई बतौर समीक्षा बैठक जिसमें स्वयं जिले के कलेक्टर कुंदन कुमार मौजूद रहे मगर खनिज विभाग के इस राजस्व चोरी का गंभीर मामला पर चर्चा भी ना करना समझ से परे रहा।