“अमर टापू (मोतिमपुर) में भरभराकर गिरे पुल और RTO बिल्डिंग दोनों काम का है एक ही ठेकेदार”
मुंगेली। लोक निर्माण विभाग के द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। करीब एक वर्ष पूर्व निर्मित शासकीय जिला परिवहन अधिकारी (RTO) कार्यालय की नई इमारत पहली ही बारिश में अपनी गुणवत्ता की पोल खोलती नजर आई। भवन की छत से पानी टपकने और कई स्थानों पर सीपेज होने से कार्यालयीन कार्य प्रभावित हुए, वहीं कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को भी काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।
गौरतलब है कि इस भवन का लोकार्पण लगभग एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। लेकिन पहली ही बारिश में भवन के भीतर पानी का रिसाव शुरू हो गया। इतना ही नहीं, कार्यालय तक पहुंचने वाला मार्ग आज भी पूरी तरह पक्का नहीं बन पाया है। लगातार बारिश के चलते पूरे परिसर में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे मुख्य मार्ग तालाब जैसा दिखाई देने लगा और आवागमन भी प्रभावित हुआ।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण के एक वर्ष के भीतर ही भवन में इस प्रकार की तकनीकी खामियां सामने आने लगी हैं तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों के कार्यों की समय-समय पर प्रभावी निगरानी नहीं होने तथा जवाबदेही तय नहीं किए जाने के कारण इस तरह की लापरवाही सामने आती है।
बता दें जिला परिवहन कार्यालय भवन निर्माण का जो ठेकेदार है वहीं ठेकेदार (मैसर्स क्रांति कंस्ट्रक्शन) अमर टापू के भरभराकर गिरे पुल का भी ठेकेदार है। लगभग एक माह पूर्व साढ़े चार करोड़ की लागत से निर्मित हो रहे पुल निर्माण का एक स्नैप भरभराकर गिर गया था हालांकि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई मगर घटना बड़ी थी बावजूद लोक निर्माण विभाग माह भर से चुप्पी साधे बैठा है और अचानक उसी ठेकेदार द्वारा निर्मित जिला परिवहन कार्यालय भवन में पानी टपकने,सीपेज और आधे अधुरे निर्माण के कारण पहली बरसात में खुली पोल से लोक निर्माण विभाग के कार्यप्रणाली को स्पष्ट दर्शा रहा है। बावजूद विभाग मूकदर्शक मुद्रा में नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि लोक निर्माण विभाग पूरे मामले की तकनीकी जांच कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण कराए। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता अथवा निर्धारित मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी बनी रहे।