अटैचमेंट हटाने की आड़ में PWD में विवादित प्रभार! कार्यपालन अभियंता के आदेश पर उठे सवाल

  • सरकार के अटैचमेंट समाप्त करने के निर्देश के बाद भी अन्यत्र जिलों के लिए ही नियुक्त ग्रेड-2 कर्मचारी को वरिष्ठ लिपिक बजट (वरिष्ठ लेखा लिपिक)का प्रभार देने का आरोप
  • सेवा शर्तों और स्थानांतरण आदेश की अनदेखी का दावा

मुंगेली। राज्य सरकार द्वारा विभागों में वर्षों से चल रहे अटैचमेंट को समाप्त करने के सख्त निर्देश जारी किए जाने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना वाले स्थानों पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए रिलीव किया जा रहा है। इसी बीच लोक निर्माण विभाग (PWD) मुंगेली में जारी एक प्रभार आदेश को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

आरोप है कि कार्यपालन अभियंता ने मुंगेली डिवीज़न में पदस्थ वरिष्ठ लिपिक बजट (वरिष्ठ लेखा लिपिक) का अटैचमेंट समाप्त होने के बाद वरिष्ठ लिपिक बजट (वरिष्ठ लेखा लिपिक) का प्रभार विभाग में अवैधानिक ढंग से सेवारत एक ग्रेड-2 कर्मचारी को सौंप दिया। दावा किया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी की सेवा शर्तों के अनुसार उसकी नियुक्ति केवल चिन्हांकित सात बीहड़ एवं वनांचल जिलों में ही की जा सकती थी, लेकिन वह पहले अटैचमेंट के माध्यम से मुंगेली पहुंचा और बाद में स्थानांतरण आदेश के बावजूद न्यायालय में लंबित प्रकरण का हवाला देकर लंबे समय से मुंगेली डिवीजन में ही कार्यरत है।

यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि विभागीय अधिकारियों ने कर्मचारी की वास्तविक सेवा स्थिति और सेवा शर्तों की जानकारी न तो शासन के समक्ष स्पष्ट रूप से रखी और न ही न्यायालय के समक्ष, जिसके कारण वह वर्षों से मुंगेली में कार्यरत बना हुआ है। ऐसे में उसी कर्मचारी कोवरिष्ठ लिपिक बजट (वरिष्ठ लेखा लिपिक) का प्रभार सौंपे जाने को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, पूर्व में पदस्थ रहे आधा दर्जन से अधिक कार्यपालन अभियंताओं ने संबंधित कर्मचारी के विवादित रिकॉर्ड को देखते हुए उसे कोई महत्वपूर्ण प्रभार नहीं दिया था। इसके अलावा पूर्व में उक्त क्लर्क का शिकायतों के आधार पर सुकमा स्थानांतरित कर दिया गया था इसके बावजूद अब उसे मुंगेली डिवीज़न ऑफिस में वरिष्ठ लिपिक बजट (वरिष्ठ लेखा लिपिक) जैसे पद का प्रभार दिए जाने से विभाग के भीतर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

चर्चा यह भी है कि यदि इस मामले में सेवा शर्तों, स्थानांतरण आदेश और प्रभार दिए जाने की वैधानिकता को लेकर याचिका दायर होती है तो विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को न्यायालय में जवाब देना पड़ सकता है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध क्या विभागीय कार्रवाई होगी और क्या उसकी पदस्थापना की वैधता की भी जांच होगी।

लोरमी के एक व्यक्ति विशेष की भूमिका की चर्चा

विभागीय सूत्रों के बीच यह चर्चा भी है कि संबंधित कर्मचारी को वरिष्ठ लिपिक बजट (वरिष्ठ लेखा लिपिक) का महत्वपूर्ण प्रभार दिलाने में लोरमी के एक नेतानुमा प्रभावशाली व्यक्ति की अहम भूमिका रही है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले से जुड़े लोगों का दावा है कि प्रभार आदेश के पीछे अनैतिक दबाव और कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों एवं दस्तावेजों का खुलासा आगामी दिनों में किया जाएगा।

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