IPS रतनलाल डांगी मामले में हाईकोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई, पीड़िता ने सीनियर IAS अधिकारी से जांच कराने की मांग की

बिलासपुर। राजकिशोर नगर, बिलासपुर निवासी एक योग प्रशिक्षिका द्वारा वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के विरुद्ध लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में दायर रिट याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई प्रस्तावित है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई है।

याचिका के अनुसार, पीड़िता की मुलाकात उस समय पुलिस महानिरीक्षक रहे रतनलाल डांगी से हुई थी। कथित तौर पर डांगी ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए उनसे ऑनलाइन योग प्रशिक्षण देने का अनुरोध किया। पीड़िता का आरोप है कि कुछ महीनों बाद ऑनलाइन योग कक्षाओं के दौरान डांगी ने वीडियो कॉल पर अश्लील बातचीत और अशोभनीय हरकतें करना शुरू कर दिया। आरोप है कि वे वीडियो कॉल के दौरान निर्वस्त्र हो जाते थे तथा पीड़िता पर लंबे समय तक ऑनलाइन बने रहने का दबाव बनाते थे।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर डांगी ने पीड़िता और उसके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। पीड़िता के अनुसार, उसके पति पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें झूठे आपराधिक प्रकरण में फंसाने तथा नक्सल प्रभावित जिलों में स्थानांतरण कराने जैसी धमकियां दी गईं। साथ ही सहयोग करने पर लाभ पहुंचाने का भी कथित आश्वासन दिया गया।

पीड़िता का दावा है कि उसने व्हाट्सएप चैट और वीडियो कॉल से संबंधित कथित डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे हैं। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी।

शिकायत के बाद तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक आनंद छाबड़ा और तत्कालीन उप पुलिस महानिरीक्षक मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि जांच के दौरान उसे यह महसूस हुआ कि दोनों अधिकारी निष्पक्ष जांच नहीं कर रहे हैं और आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि आनंद छाबड़ा, रतनलाल डांगी के समान रैंक के अधिकारी रहे हैं, इसलिए उनके द्वारा जांच किया जाना उचित नहीं है। वहीं, मिलना कुर्रे उस समय आरोपी अधिकारी से कनिष्ठ रैंक पर थीं, इसलिए उनकी जांच की अधिकारिता पर भी प्रश्न उठाया गया है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि आनंद छाबड़ा के विरुद्ध महादेव सट्टा एप प्रकरण से संबंधित मामला विचाराधीन होने का हवाला देते हुए पीड़िता ने उनसे भी जांच नहीं कराने की मांग की है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद राज्य शासन ने प्रारंभिक स्तर पर रतनलाल डांगी को निलंबित नहीं किया था। पीड़िता का दावा है कि रायपुर में प्रेस वार्ता आयोजित किए जाने के बाद उन्हें निलंबित किया गया।

रिट याचिका में मांग की गई है कि वर्तमान जांच अधिकारियों को हटाकर किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, विशेष रूप से महिला आईएएस अधिकारी, से मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में आरोपी अधिकारी की कथित अवैध संपत्तियों की जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करते हुए सेवा से बर्खास्त करने की भी मांग की गई है।

मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अगले सप्ताह सिविल रिट (डब्ल्यूपी-सी) रोस्टर के अनुसार होने की संभावना है।

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