डेटा, सटीकता और दूरदृष्टि के साथ तैयार हो रहे हैं भारत के कल के शहर

श्री तोखन साहू, माननीय राज्य मंत्री, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार

भारत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। हमारे शहर आज अवसर, नवाचार, रोजगार और आकांक्षाओं के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। वर्ष 2047 तक देश की शहरी आबादी लगभग 90 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में शहरीकरण भारत की विकसित राष्ट्र की यात्रा को आकार देने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक होगा।

यह अभूतपूर्व विस्तार हमारे सामने अवसर के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी रखता है। कल के शहरों की योजना आज के पुराने साधनों से नहीं बनाई जा सकती। हमें ऐसी शहरी योजना और शासन व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो भविष्य की जरूरतों का पूर्वानुमान लगा सके, उभरती चुनौतियों का समाधान कर सके और नागरिकों के लिए सुरक्षित, समावेशी एवं भविष्य के लिए तैयार शहरों का निर्माण सुनिश्चित करे।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय इसी दिशा में भारत के शहरीकरण को नई दिशा दे रहा है। हमारा प्रयास ऐसे शहरों की नींव तैयार करना है, जो किफायती, जुड़े हुए, टिकाऊ और भविष्य के लिए सक्षम हों।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी एवं PMAY-U 2.0 के माध्यम से गरिमापूर्ण और किफायती आवास, AMRUT एवं AMRUT 2.0 के माध्यम से जल और शहरी अधोसंरचना, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के माध्यम से स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, Transit-Oriented Development (TOD) के माध्यम से सघन एवं टिकाऊ शहरी विकास तथा PM e-Bus Sewa के माध्यम से स्वच्छ और कुशल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये पहल केवल अधोसंरचना का निर्माण नहीं कर रहीं, बल्कि आने वाले दशकों के भारत के शहरों की दिशा तय कर रही हैं।

भविष्य की चुनौतियों के लिए आज की तैयारी

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरी बाढ़, यातायात दबाव, जल संकट, अपशिष्ट प्रबंधन, अत्यधिक गर्मी और मौजूदा अधोसंरचना पर बढ़ता दबाव जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इनका समाधान केवल समस्याओं के उत्पन्न होने के बाद प्रतिक्रिया देकर नहीं किया जा सकता। हमें विकास का पूर्वानुमान लगाकर योजना बनाने की आवश्यकता है।

इसी सोच के साथ सरकार ने शहरी विकास में तकनीक, डेटा और वैज्ञानिक नियोजन को केंद्र में रखा है। AMRUT के अंतर्गत GIS आधारित मास्टर प्लान तैयार करने के लिए एक समर्पित उप-योजना शुरू की गई है। यह 100 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित पहल है, जिसके माध्यम से शहरों को दीर्घकालिक डिजिटल प्लानिंग की क्षमता प्रदान की जा रही है।

AMRUT GIS उप-योजना के तहत 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 461 शहरों को जोड़ा गया है। इनमें 437 शहरों के अंतिम भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार हो चुके हैं, जबकि 404 शहरों के ड्राफ्ट GIS आधारित मास्टर प्लान तैयार किए गए हैं, जिनमें से 292 मास्टर प्लान अंतिम रूप ले चुके हैं।

छोटे शहरों को भी आधुनिक नियोजन का लाभ

भारत का शहरी विकास केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहर और कस्बे भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं और उन्हें भी गुणवत्तापूर्ण शहरी नियोजन तथा अधोसंरचना की आवश्यकता है।

इसी उद्देश्य से AMRUT 2.0 के अंतर्गत 50,000 से 99,999 आबादी वाले 875 Class-II कस्बों के लिए GIS आधारित मास्टर प्लान उप-योजना शुरू की गई है। इसके तहत 399 कस्बों के ड्राफ्ट भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार किए गए हैं, जिनमें 100 अंतिम रूप से तैयार हो चुके हैं। वहीं 136 कस्बों के ड्राफ्ट GIS आधारित मास्टर प्लान तैयार किए गए हैं, जिनमें से 93 अंतिम रूप ले चुके हैं।

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक शहरी नियोजन का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों तक भी पहुंचेगा।

डेटा से सटीक होगी शहरी योजना

इस परिवर्तन के केंद्र में अत्याधुनिक भू-स्थानिक तकनीक है। AMRUT के अंतर्गत 1:4000 स्केल पर Very High Resolution Satellite imagery का उपयोग कर मानकीकृत भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार किए जा रहे हैं। AMRUT 2.0 में इसे और मजबूत करते हुए Satellite imagery के साथ Drone/UAV mapping को 1:1000 स्केल पर अपनाया जा रहा है।

इन भू-स्थानिक डेटाबेस का PM Gati Shakti National Master Plan के साथ एकीकरण शहरी स्थानीय निकायों को विभिन्न विभागों और क्षेत्रों के बीच अधोसंरचना नियोजन में बेहतर समन्वय की क्षमता प्रदान करता है।

इससे शहरों की योजना अब केवल स्थिर नक्शों के आधार पर नहीं, बल्कि सड़क, भवन, जल निकाय, भूखंड, अधोसंरचना नेटवर्क और अन्य शहरी परिसंपत्तियों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर अधिक सटीक तरीके से तैयार की जा सकेगी।

तकनीक के साथ संस्थागत क्षमता निर्माण

किसी भी परिवर्तन की सफलता केवल तकनीक पर निर्भर नहीं करती। उसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत संस्थागत क्षमता भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और शहरी स्थानीय निकायों के लिए तकनीकी कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।

AMRUT GIS उप-योजना के तहत 79 क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में लगभग 2,968 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। वहीं AMRUT 2.0 GIS उप-योजना के अंतर्गत 34 क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में लगभग 2,648 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

इन प्रयासों से एक ऐसा GIS-सक्षम डिजिटल प्लानिंग इकोसिस्टम विकसित हो रहा है, जो मास्टर प्लान तैयार करने, उनमें संशोधन करने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में राज्यों एवं शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता को मजबूत करेगा।

स्थिर नक्शों से गतिशील नियोजन की ओर

हमारी दृष्टि स्पष्ट है—भारत का शहरीकरण नियोजित, टिकाऊ, समावेशी और तकनीक-सक्षम होना चाहिए। हमें स्थिर नक्शों से गतिशील नियोजन, बिखरे हुए विकास से एकीकृत विकास और प्रतिक्रियात्मक शासन से डेटा आधारित निर्णय-प्रक्रिया की ओर आगे बढ़ना है।

भारत के शहरी भविष्य के लिए साहसिक सोच और आधुनिक तकनीक दोनों आवश्यक हैं। GIS और डिजिटल मास्टर प्लान को शहरी नियोजन के केंद्र में रखकर हम ऐसे शहरों की नींव तैयार कर रहे हैं, जो नियोजित, टिकाऊ, सुदृढ़, समावेशी और नागरिक-केंद्रित हों।

यह केवल शहरी नियोजन के आधुनिकीकरण की पहल नहीं है। यह विकसित भारत के लिए ऐसे शहरों के निर्माण का संकल्प है, जहां आने वाली पीढ़ियां बेहतर जीवन, बेहतर अवसर और बेहतर भविष्य के साथ आगे बढ़ सकें।

— श्री तोखन साहू
राज्य मंत्री, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार

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