रायपुर/बिलासपुर। आंगनबाड़ी केंद्र में डीजे का सामान रखकर की गई लापरवाही से मासूम बच्ची की मौत पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने तीखे शब्दों में पूछा – “आखिर आंगनबाड़ी परिसर में डीजे का सामान क्यों रखा गया, क्या वहां नाच-गाना होता है?”
कोर्ट ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर घटना है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने बिलासपुर कलेक्टर से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट तलब की और पीड़ित परिवार को दी गई आर्थिक मदद का ब्यौरा मांगा।
बिलासपुर जिले के शहरी क्षेत्र में एक आंगनवाड़ी केंद्र में हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे में एक बालिका की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि केंद्र में रखे डीजे साउंड सिस्टम के पाइप से लगी चोट के कारण बालिका की मृत्यु हुई।
घटना के बाद जिला प्रशासन ने रेड क्रॉस फंड से मृतका के परिवार को 50 हजार रुपये की सहायता दी।
घटना पर संज्ञान लेते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया और राज्य सरकार को आदेश दिया कि पीड़ित परिवार को तुरंत 2.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। मगर, इस पूरे घटनाक्रम ने बाल विकास विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। आंगनवाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी और निरीक्षण की जिम्मेदारी सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारियों की होती है, जिनकी रिपोर्ट जिला प्रशासन तक पहुंचती है। इसके बावजूद, इस केंद्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई, जिसके परिणामस्वरूप यह हादसा हुआ।
अब तक विभाग के किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उल्टा, वही अधिकारी जो निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे, अब केंद्रों को सतर्क करने के आदेश भेज रहे हैं।
यह सवाल उठता है कि बालिका की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर जिला प्रशासन और राज्य सरकार क्या कदम उठाएगी?