मनेन्द्रगढ़। एसईसीएल के हसदेव प्रक्षेत्र के विद्युत एवं यांत्रिक विभाग के अधिकारी ने टेण्डर अवार्ड करने के लिए अधिकारी ने 2 लाख रूपए रिश्वत मांगे और नहीं देने पर टेण्डर ही निरस्त कर दिया। टेण्डर की न्यूनतम दर देने वाले ठेका फर्म की ओर से कंपनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक को इसकी लिखित शिकायत की गई है। इसमें यह भी बताया गया है रिश्वत की मांग फोन पर की गई थी जिसकी वायस रिकार्डिंग भी उसके पास उपलब्ध है। अधिकारी ने नया टेण्डर भी बुला लिया है। फर्म ने नए टेण्डर पर रोक लगाने की मांग सीएमडी से की है।
शिकायत में फर्म में आर.पी. जायसवाल ने बताया कि उसने 46 प्रतिशत नीचे का रेट दिया था। प्रक्षेत्र के विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग के महाप्रबंधक ने संजीव आनंद ने टेण्डर अवार्ड करने के लिए दो लाख रूपए रिश्वत मांगे। इससे मना करने पर अधिकारी ने टेण्डर निरस्त करने की धमकी दी। फोन पर दी गई इस धमकी की वायस रिकार्डिंग भी उसके पास है। आखिरकार अधिकारी ने रिश्वत के रूप में मांगी गई रकम नहीं देने पर टेण्डर निरस्त करने का दांवपेंच शुरू कर दिया।
टेण्डर के 46 प्रतिशत नीचे के रेट को असामान्य बताते हुए पहले जवाब मांग गया। ठेकेदार ने समय सीमा पर गुणवत्ता पूर्ण काम करने जवाब भी दे दिया और बताया कि इससे और नीचे के रेट पर एसईसीएल में टेण्डर हुए हैं और काम भी हुए हैं लेकिन इस जवाब को दरकिनार कर टेण्डर निरस्त कर दिया और धरोहर राशि जब्त कर लेने का आदेश जारी कर दिया गया। अधिकारी संजीव आनंद इसी माह रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने आनन-फानन में नया टेण्डर भी जारी कर दिया।
सीएमडी को की गई शिकायत में मामले की जांच कराने का अनुरोध करते हुूए नए टेण्डर पर रोक लगाने की मांग की गई है और विश्वास व्यक्त किया गया है कंपनी की अच्छी छवि की खातिर वे इस मामले को पूरी गंभीरता से लेंगे। अगर मामले में जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो हाईकोर्ट जाने पर विचार किया जायेगा।
सुनियोजित ढंग से जवाब-दावा के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया
शिकायत में बताया गया है कि रेट को असामान्य बताकर जवाब के लिए नोटिस जारी किया गया। पहले नोटिस में 48 घंटे और दूसरे नोटिस में जान-बूझकर 24 घंटे का समय दिया गया। इससे अधिकारी की नीयत का अंदाला लगाया जा सकता है।
अकेले ही ले लिया निर्णय किसी भी टेण्डर पर निर्णय के लिए टेण्डर कमेटी होती है। असामान्य स्थिति निर्मित होने पर यह कमेटी ही अंतिम निर्णय लेती है। टेण्डर निरस्त करने के लिए चलाई गई नोटशीट पर कमेटी के सदस्यों की राय तक अंकित नहीं है और न ही उनके हस्ताक्षर ही हैं।