~ कलेक्टर तत्काल ले मामले को संज्ञान में साथ ही टीकाकरण नही कराने वाले परिवारों का राशन बन्द करने का जारी हो आदेश
~ महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर घर टीकाकरण के लिए धमकाया जा रहा
~ पोषण माह,आंगनबाड़ी की जवाबदेही के बावजूद कोरोना टीकाकरण कराने के लिए लगातार डाला जा रहा दबाव
~ कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार सर्वे और वस्तुस्थिति से अवगत कराने के बावजूद संक्रमण के दौर में मूलभूत काम छोड़ टीकाकरण के लिए घर घर भेजा जा रहा
~ जागरूक लोग करा चुके है टीका अब लगातार जाने पर लोगो द्वारा की जा रही बदतमीजी
बिलासपुर। लंबे विवादों में पदस्थ रहे सुरेश सिंह के सुकमा भेजे जाने के बाद भी बिलासपुर महिला बाल विकास विभाग के कार्यप्रणाली में खास अंतर नजर नही आ रहा है। नवपदस्थ महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा ऑफिसियल फरमान से इन दिनों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जीना मुहाल हो गया है। कोरोना टीकाकरण के लगातार सर्वे और वैक्सीन के लिए कहने के बावजूद नही जा रहे लोगो को मानो महिला बाल विकास अधिकारी ने कोई जादुई डंडा दे रखा हो जिसके आदेश से अब घर घर महिला कार्यकर्ता अपने पोषण माह के कार्यक्रम को छोड़ जाए और उन्हें टीकाकरण के लिए बाध्य करें। महिला बाल विकास अधिकारी के ऐसे तुगलकी फरमान के बाद सभी महिला कार्यकर्ताओं में भयंकर आक्रोश देखने को मिल रहा है शीघ्र ही सभी कार्यकर्ताओं द्वारा महिला बाल विकास अधिकारी के हिटलर अंदाज की शिकायत कलेक्टर से करने की तैयारी में है।
बता दे महिलाओ के सबसे प्रमुख त्योहार कहे जाने वाले हरितालिका तीज में भी लगातार सर्वे एवं वैक्सीन के लिए बचे लोगो को कहने के बावजूद नही जा रहे लोगो को घर घर जाकर निकाल टीकाकरण करने का फरमान जारी किया गया है वर्तमान में अभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण माह मनाया जा रहा है बावजूद जिला महिला बाल विकास अधिकारी सुपरवाइजर लोगो पर लगातार दबाव डाल घर घर घूमने कहा जा रहा है जबकि महीनों पूर्व वैक्सीन सर्वे और टीकाकरण के लिए अन्तिम रिपोर्ट सभी कार्यकर्ताओं द्वारा विभाग को दी जा चुकी है बावजूद बचे लोगो को घर घर जाकर निकाल टीकाकरण कराने का तुगलकी फरमान से सभी जिले के आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में भयंकर आक्रोश देखा जा रहा है।
पोषण माह,नियमित काम के अलावा निर्वाचन की भी मिली है जवाबदारी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अपने सभी नियमित कामों के अलावा वर्तमान में निर्वाचन विभाग में ड्यूटी का भी आदेश मिला हुआ है। ऐसे में सभी कार्यकर्ताओं द्वारा अपने कामकाज के अलावा निर्वाचन की जवाबदेही की जा रही है जिसके बावजूद लगातार महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा टीकाकरण के लिए अनैतिक दबाव डाल महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक अभी जो जिला महिला बाल विकास अधिकारी सुरेश सिंह के तबादले के पहले जिला परियोजना अधिकारी के रूप में लगातार दबाव के बावजूद एक अधिकारी को प्रभार नही मिला था। एकाएक एक नेता के दबाव में नए जिला महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा नेता के मुहलगे अधिकारी को प्रभारी जिला परियोजना अधिकारी का प्रभार दिया गया है। अब ये दोनों अधिकारियों की जुगलबंदी से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं लगातार प्रताड़ित हो रही है। आंगनबाड़ी के नियमित अवश्यक कार्य के बावजूद निर्वाचन की ड्यूटी ऊपर से टीकाकरण का औचित्य हीन दबाव के बावजूद सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा शीघ्र कलेक्टर से मिल मामले को संज्ञान में लाने की तैयारी है। अब देखना यह होगा कि नवपदस्थ जिला महिला बाल विकास अधिकारी अपने विभाग के मूलभूत कामो को प्राथमिकता देती है या टीकाकरण के लिए दबाव डाल तुगलकी फरमान जारी करती रहती है।

