
~ पत्थलगांव फिर ठगा गया,जिला नही बनने से नागरिको में निराशा,कहा विधायक रामपुकार सही ढंग से जिला बनाने का पक्ष नहीं रख सके
~ जब जब आवाज उठी पत्थलगांव व मनेन्द्रगढ़ दोनो की एकसाथ उठती रही मगर मनेन्द्रगढ़ बस का जिला बनाया जाना पत्थलगांव के लोगो के लिए आज बेहद निराशाजनक देखा गया
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश में 4 नए जिले मनेंद्रगढ़ शक्ति मानपुर सारंगढ़ की घोषणा में पत्थलगांव का नाम शामिल नही होने से पत्थलगांव के निवासियों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है पत्थलगांव वासियों का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने क्षेत्रवासियों के साथ धोखा किया है उन्हें पूरी तरह उम्मीद थी कि अन्य नए जिलों की घोषणा के साथ ही पत्थलगांव को भी जिला की घोषणा की जानी थी परंतु कोई घोषणा नहीं की गई विदित हो कि बरसों से पत्थलगांव को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर यहां आंदोलन होता रहा है।
उम्मीद थी कि कांग्रेस की सरकार में सबसे वरिष्ठ विधायक पत्थलगांव के विधायक रामपुकार सिंह के गृह नगर पत्थलगांव को नवीन जिला का घोषणा इस बार तो होना ही था जिला में नाम नही आने से भाजपा के लोगो का कहना है की पत्थलगांव विधायक सही ढंग से पत्थलगांव जिला बनाने का पक्ष नहीं रख सके यही वजह है कि वर्षों पुरानी मांग की घोषणा नहीं हो सका जिससे क्षेत्र के लोगों में निराशा देखी जा रही है लोगों का कहना है कि हमारा दुर्भाग्य है कि पत्थलगांव क्षेत्र से आने वाले कांग्रेश व भाजपा दोनों के जनप्रतिनिधि पत्थलगांव को जिला बनाने की मांग की आवाज नहीं बन सके, पत्थलगांव के लिए जिला की घोषणा नहीं होने से क्षेत्र में काफी निराशा देखी जा रही है। वही नागरिको का कहना है की जिला बनाने की मांग को लेकर न तो भाजपा और न ही कांग्रेस किसी ने भी ठोस पहल नही की यही वजह है की आज हम अपने आप को ठगा मह्सुस कर रहे है।
विदित हो की पिछली बार पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी पत्थलगांव में भाजपा का विधायक आने पर पत्थलगांव को जिला बनाने का आश्वासन दिया था लेकिन उन्होंने भी पत्थलगांव को दरकिनार कर दिया था
स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ी घोषणा की है। सीएम ने प्रदेश में चार नए जिले सक्ति, मनेन्द्रगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मोहला-मानपुर को जिला बनाने का ऐलान किया है।
ध्वजारोहण के बाद सीएम ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत ने दो शताब्दी से अधिक अंग्रेजों की प्रताड़ना सहा है। ग़ुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए भारत माता के हजारों हजार सपूतों और पुत्रियों ने अपना सर्वस्व परित्याग किया है। उन वीरों को याद करते ही हमारे नेताओं में अपने महान पुरखों का खून उबालने लगता है और उन सबके त्याग के बारे सोचकर आंखें नम हो जाती है।