हेकड़ीबाज डिप्टी कलेक्टर नारायण गवेल अंततः भेजे गए बीजापुर

~ कुछ पुराने प्रमोशन प्राप्त तहसीलदार से बने डिप्टी कलेक्टर भी है रडार में

~ मंत्रियों, नेताओ को रिश्तेदार बता एक अधिकारी तहसील मुंगेली का किया 28 महीने के कार्यकाल में सत्यानाश!

~ 3 से 4 हजार प्रमाणीकरण,नामांतरण के काम है मुंगेली तहसील में लंबित

~ तत्कालीन कलेक्टर पीएस एल्मा के आदेशों की हुई थी जमकर अवहेलना

~ राजस्व मंत्री को चनामुर्रा समझने वालो हो जाओ सावधान!

~ विभागीय जांच लंबित होने के बावजूद प्रमोशन गलत ढंग से हुए, होगी उनकी जांच

बिलासपुर। अतिरिक्त तहसीलदार के पद पर रहते हुए नारायण गवेल ने एक से बढ़ कर एक कारनामा राजस्व विभाग में किया है। जिसकी लगातार शिकायत के बावजूद राजनैतिक आकाओं ने सर पर बैठा लंबे समय तक बिलासपुर में ही बिठाए रखा, हद तो तब हो गई इन्हें(नारायण प्रसाद गवेल) को सरकार ने ढेरो शिकायत को कचरे की टोकरी में डाल पदोन्नति भी दे दी। कुछ ऐसे ही नमूने और उदाहरण मुंगेली जिले में भी रहे जो आज बिना किसी उपलब्धि, विभागीय जांच अनेक बार निलंबन की सजा और बहुत से कारणों से हाई कोर्ट में उलझे एक आरामपरस्त, तोंद बाज अधिकारी को मुंगेली जिले में पदोन्नति दे कर अन्य जिला स्थानांतरित कर दिया गया है। मगर सवाल यह अहम है क्या ऐसे आरामपरस्त, भ्रस्टाचार की आकंठ में डूबे अधिकारी को क्या पदोन्नति दी जानी चाहिए थी? और विभागीय काले करम को नजर अंदाज कर पदोन्नति देने के खेल में किन नेताओ का शह मिला? इन सबकी जांच होनी चाहिए।

बता दे बिलासपुर में भी लंबे समय तक जमे रहे विभाग के बड़े से बड़े अधिकारी को अपने सामने बौना समझने वाले नारायण गवेल को आखिरकार बीजापुर ट्रांसफर कर दिया गया है। नारायण गवेल बिलासपुर तहसीलदार के पद पर रहते हुए मोपका धान मंडी के पीछे खसरा न. 993/1/ज को हवा में उड़ा कर सड़क के किनारे शासकीय जमीन में बैठा दिया। यही नही उस खसरा का बटांकन नही हुआ पर सीमांकन कर दिया गया। मोपका से लेकर लिंगियाडीह तक ऐसे कितने मामले है। इस पूरे मामले में एक पटवारी जो कि एसीबी और ईडी के राडार में लंबे समय से है जिसके खिलाफ कार्यवाही लंबित है। मगर उच्च पदस्थ प्रभावशाली लोगों के दबाव व नेताओ के तलवे चाटने में माहिर बिलासपुर के इस पटवारी का अब तक कार्यवाही के नाम पर आधा दर्जन से अधिक हल्के ही बदले गए मगर अब तक विभागीय कोई बड़ी कार्यवाही नही देखी गयी है। जिसके पीछे इस पटवारी के एक रिश्तेदार के ही इसी विभाग में उच्च पद में पदस्थ रहना मुख्य कारण माना जा रहा है। मगर इन आकाओं अथवा अन्य कारणों से एसीबी की रडार में रहे अदने से पटवारी के लिए सरकार कब तक अपनी किरकिरी कराते रहेंगी।

मालूम हो नारायण गवेल के खिलाफ जो जांच चल रही है उसका क्या होगा ? सूत्रों की माने तो नारायण गवेल के खिलाफ एसीबी मामला दर्ज कर अपनी जांच तेज कर दिया है और जल्द ही नारायण गवेल और उनके सहयोगी पटवारी के खिलाफ शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।

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