छत्तीसगढ़ की बेटी ने फतह किया किलिमंजारो:5,895 मीटर ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा

छत्तीसगढ़ की बेटी पर्वतारोही याशी जैन ने दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो को फतह कर लिया है। रायगढ़ जिले की रहने वाली याशी ने रविवार 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन करीब साढ़े 9 बजे (भारतीय समयानुसार) 5 हजार 895 मीटर ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया।

किलिमंजारो पर्वत दक्षिण अफ्रीका के तंजानिया में है। उन्होंने 24 सितंबर से दक्षिण अफ्रीका जाने के लिए अपनी यात्रा शुरू की थी। वे रायपुर से दिल्ली होते हुए इथोपिया और तंजानिया पहुंचीं। 27 सितंबर से उन्होंने किलिमंजारो पर्वत पर अपनी चढ़ाई शुरू की थी। उन्होंने 18 से 19 घंटे हर दिन चलकर करीब 5 दिनों में अपनी यात्रा पूरी कर गांधी जयंती के दिन चोटी पर पहुंच गईं। याशी जैन के साथ अफ्रीका के प्रमुख गाइड एलाइस साथ में चल रहे थे। उनकी टीम में अलग-अलग देशों के 6 लोग थे। अफ्रीका की कंपनी अफ्रीकन लव बर्ड्स एडवेंचर के सहयोग से याशी जैन ने आज भारत का तिरंगा किलिमंजारो पर्वत की चोटी पर फहरा दिया। बर्फीली हवाएं चलने के बावजूद भी याशी ने हिम्मत नहीं हारी। अब उन्होंने वापस पर्वत से नीचे उतरना शुरू कर दिया है।

याशी जैन किलिमंजारो पर्वत पर चढ़ती हुईं।
छत्तीसगढ़ सकल दिगंबर जैन समाज के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश मोदी ने बताया कि तंजानिया की टाइमिंग से करीब आज सुबह 7 बजे याशी जैन ने किलिमंजारो पर्वत की चोटी पर तिरंगा फहराया। उन्होंने कहा कि तिरंगा फहराने के बाद याशी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और गांधी जी जिंदाबाद के नारे लगाए।

प्रकाश मोदी ने बताया कि याशी से मिली जानकारी के मुताबिक, किलिमंजारो पर्वत पर बहुत तेज बर्फीली हवाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि याशी ने लोगों से महात्मा गांधी और भगवान महावीर के बताए रास्ते पर चलने की अपील की है। याशी ने बताया कि विश्व के लोग आपसी मतभेदों को भुलाकर अहिंसा के मार्ग पर चलें, तभी दुनिया का विकास होगा। वहीं याशी के पिता अखिलेश जैन अपनी बेटी की उपलब्धियों से बेहद खुश हैं।

याशी जैन किलिमंजारो पर्वत पर चढ़ाई करने के दौरान।
याशी ने पहले भी कई पर्वतों को फतह कर छत्तीसगढ़ और देश का नाम रोशन किया है। पर्वतारोही याशी ने इससे पहले यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस, नेपाल के माउंट आईलैंड पीक, लोबुचे पीक और भारत के कई पर्वतों पर तिरंगा फहराया है। वे साल 2021 में माउंट एवरेस्ट को भी फतह करने की कोशिश कर चुकी हैं, जहां कैंप 4 तक लगभग 8000 मीटर की ऊंचाई तक वे पहुंच भी गई थीं, लेकिन खराब मौसम के चलते महज 800 मीटर की ऊंचाई बाकी रहने पर उन्हें वापस लौटना पड़ा था।

याशी जैन अपने कैंप में लंच लेती हुईं।
रायगढ़ निवासी अखिलेश जैन की बेटी याशी जैन ने छोटी उम्र में ही देश-दुनिया में अपनी पहचान बना ली है। वे रायगढ़ की एकमात्र पर्वतारोही हैं। याशी ने दाजर्लिंग के हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट से बेसिक कोर्स के बाद उत्तरकाशी के नेहरू माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स किया। दिसंबर 2017 में उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप (17,600 फीट) और काला पत्थर (18,510 फीट) की सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। मई 2018 में उन्होंने माउंट जोगिन पर फतह हासिल की थी। जुलाई 2019 में याशी ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस पर तिरंगा फहराया था।

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