छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने दस दिवसीय जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास के बाद देर रात नई दिल्ली लौट रहे हैं। कल दोपहर वे रायपुर पहुँचेंगे। यह यात्रा केवल कूटनीतिक दौरा भर नहीं थी, बल्कि इसे छत्तीसगढ़ के भविष्य की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
निवेश और वैश्विक साझेदारी की नई संभावनाएँ
मुख्यमंत्री ने इस प्रवास के दौरान निवेशकों और उद्योगपतियों से संवाद किया तथा छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया।
टोक्यो और ओसाका में उन्होंने जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JETRO) सहित कई प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों और संस्थानों से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने राज्य की नई औद्योगिक नीति 2024–30 का उल्लेख करते हुए आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, क्लीन एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री का कहना था कि “छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज और इस्पात का राज्य नहीं, बल्कि नवाचार, तकनीक और वैश्विक साझेदारी का नया केंद्र बन रहा है।”
उच्च तकनीकी क्षेत्रों में नई पहचान
इस दौरे का सबसे अहम परिणाम यह रहा कि अब छत्तीसगढ़ को केवल खनिज और धान उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर, आईटी और फार्मा जैसे उच्च तकनीकी क्षेत्रों के लिए भी निवेश का गंतव्य माना जाने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन बैठकों में बनी सहमतियों को ज़मीन पर उतारा गया, तो बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को रोज़गार और विकास का नया रास्ता मिलेगा। इससे नक्सल उन्मूलन की लड़ाई को सामाजिक और आर्थिक आधार भी मिलेगा।
युवाओं और रोजगार पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस यात्रा से हुए समझौते केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यह प्रदेश के युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर भी खोलेंगे। उनकी प्राथमिकता है कि बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित इलाक़ों में उद्योग स्थापित कर युवाओं को रोजगार दिया जाए।
उन्होंने कहा – “जब रोज़गार और विकास पहुँचेंगे तो नक्सल समस्या स्वतः समाप्त होगी।”
विकसित भारत 2047 से जुड़ता छत्तीसगढ़
साय ने यह भी उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ को विकसित भारत की दृष्टि से जोड़ते हुए इसे एक नए औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत 2047’ का सपना, छत्तीसगढ़ के माध्यम से नई ऊँचाइयों तक पहुँचेगा।