अटल विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार जांच फिर सुर्खियों में, 6 माह बाद भी समिति नहीं दे सकी प्रतिवेदन

संयोजक सेवानिवृत्ति के करीब, उठ रहे सवाल – इधर विवादित उपकुलसचिव लगातार अवकाश पर

पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलसचिव के निष्कासन के बाद अब बिलासपुर के ही एक अन्य बड़े राजकीय विश्वविद्यालय अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में भी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। विश्वविद्यालय में वित्तीय, प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच 6 महीने बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है।

उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर अपर संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय और चार सदस्यीय कुल दो जांच समितियों का गठन किया गया था। समितियों ने विश्वविद्यालय में निरीक्षण किया था और आरोपों पर स्पष्टीकरण हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बार पत्र भी भेजे, परंतु विश्वविद्यालय की ओर से अपेक्षित जवाब तथा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

जांच समिति का कहना है कि कई रिमाइंडर भेजने के बावजूद विश्वविद्यालय मामले से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने से बचता रहा, जिसके चलते जांच लंबित पड़ी है।
अब स्थिति यह है कि जांच समिति के संयोजक प्रवीण कुमार पांडेय इसी माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिसके बाद शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि जांच “ठंडे बस्ते” में जा सकती है। सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में हुई कार्रवाई के बाद इस जांच को लेकर चर्चाएं और भी तेज हो गई हैं।

पूर्व प्रभारी कुलसचिव शैलेन्द्र दुबे लगातार अवकाश पर, मेडिकल आधार संदिग्ध बताकर छात्र नेताओं ने उठाए सवाल

इधर विश्वविद्यालय प्रशासन में एक और विवाद गहरा रहा है। पद से हटाए जाने के बाद से पूर्व प्रभारी कुलसचिव एवं वर्तमान उपकुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र दुबे लगातार मेडिकल अवकाश पर चल रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. दुबे द्वारा दिए गए मेडिकल अवकाश के बावजूद वे निजी कार्यों के लिए बाहरी गतिविधियों में सक्रिय बताए जा रहे हैं तथा राजधानी में सचिवालय एवं राजनीतिक संपर्कों में भी लगे होने की बात सामने आई है।

इस संबंध में छात्र नेताओं ने कुलपति प्रो. वाजपेयी को शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि दुबे कई महत्वपूर्ण बैठकों और दीक्षांत समारोह की तैयारियों के दौरान भी अनुपस्थित रहे, बावजूद इसके “कुलपति के संरक्षण” के चलते उनके विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
छात्र नेता सूरज सिंह ने मांग की है कि डॉ. शैलेन्द्र दुबे के मेडिकल सर्टिफिकेट एवं अवकाश कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, क्योंकि यह आचरण सेवा शर्तों एवं अनुशासन नियमों का उल्लंघन है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *