मुंगेली। लगभग 30 सालों से अवैध प्लाटिंग के पैर पसारने में जितनी कार्यवाही या कारनामे भू माफियाओं के देखने मिले उन सभी मामलों में बिना प्रशासन की मिली भगत के संभव नहीं हो सकता था मगर हर बार अवैध प्लाटिंग की आड़ में अनुविभागीय अधिकारी स्तर के अधिकारी द्वारा प्लाट कटुआ गिरोहों पर कार्यवाही के नाम पर सिर्फ मीडिया फोकस किया गया और अंदर खाने में जिला प्रशासन इन भू माफियाओं को संरक्षण देती रही है ऐसा हम नहीं बल्कि राजस्व टीम की कार्यवाही और एक वर्ष पूर्व तक हुए अनाप शनाप रजिस्ट्रियां बता रही है ।
बावजूद एसडीएम ऑफिस के जिम्मेदार अधिकारी कालोनाइजरों पर कार्यवाही और रजिस्ट्री बाधित कर देने का हवाला देते रहे है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि कितने प्लाट कटुआ गिरोहों अथवा भू माफियाओं या फिर अवैध कालोनियों की रजिस्ट्रियां शून्य जिम्मेदार अधिकारी ने करवाई? क्या इन कालोनाइजरों के दफ्तर सील किए गए या फिर रजिस्ट्री शून्य कर इन पर मुकदमा कराया गया? इन सबके जवाब में जमीनी हकीकत यही रही कि एसडीएम दफ्तर ने अभी तक वर्षों से अवैध कालोनाईजरो पर बड़े बड़े मीडिया फोकस कर उन्हें संरक्षण देते हुए ना ही टीएनसी और ना ही रेरा नेचर डेवलप होने दिया।

पूरे मामले में प्लाट कटुआ गिरोहों अथवा अवैध कालोनाईजरो ने एसडीएम की आर्टिफिशियल कार्यवाही करने के बाद टेबल के नीचे नोट शीट पर काम करवाया जाता रहा नतीजतन पचहत्तर से अस्सी प्रतिशत मुंगेली नगर पालिका की बसाहट आज नगर पालिका के लिए सिरदर्द बनी हुई है जहां नगर पालिका पर बिजली,पानी,सड़क मुहैया कराने दबाव बनाया जा रहा है हालांकि नगर पालिका में नगर सरकार सत्ता पक्ष से विपरीत होने की वजह से इन प्रशासनिक और प्लाट कटुआ गिरोह के दाल फिलहाल गल नहीं पा रही है मगर उन अवैध कालोनियों में मूलभूत सुविधाओं के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
प्लाट कटुआ गिरोह अब टीएनसी के शरण में…
दिलचस्प बात यह भी है कि प्लाट कटुआ गिरोहों और अवैध कालोनाईजरो के प्रशासनिक समन्वय में अब खलल जैसा होने के कारण सरकार के नए नियम के हवाले से ये प्लाट कटुआ गिरोहों अथवा अवैध कालोनाईजरो द्वारा टीएनसी अप्रूव कालोनियों को बेचने की फिराक में लगे हुए है यदि जिला प्रशासन अथवा एसडीएम दफ्तर अपने द्वारा किए अवैध कालोनाईजरो पर कार्यवाही में ईमानदारी दिखाती और टीएनसी रेरा के अधिकारियों को वस्तु स्थिति से विभागीय अवगत करा देती तो शायद इन अवैध कालोनाईजरो या प्लाट कटुआ गिरोहों को टीएनसी दफ्तर में अपने नापाक मंसूबों पर सफलता नहीं मिल पाती मगर कहीं ना कहीं टीएनसी दफ्तर से अप्रूव कराने की कार्यवाही में भी जिला प्रशासन का मौन संरक्षण प्रतीत हो रहा है जिससे अब ये प्लाट कटुआ गिरोहों या अवैध कालोनाईजरो और भू माफियाओं द्वारा धड़ल्ले से प्लाट बेचकर मूर्ख बनाने की योजना कामयाब रहेंगे जिसके सामने जिला प्रशासन बौना अथवा नतमस्तक प्रतीत होगा।
पूरे प्रदेश में केवल मुंगेली में नजरी नक्शा की बाध्यता….
मुंगेली तहसील दफ्तर में सरकार के आदेश की भी जमकर धज्जियां उड़ाते हुए आमजनमानस के जेब में सेंध मारने का काम किया जा रहा है। वर्तमान में यदि कोई इक्का दुक्का रजिस्ट्रियां हो भी रही है वहां बी-1 के अलावा पटवारी से नजरी नक्शा बनवाने बाध्य किया जा रहा है इस संबंध में राज्य सरकार ने केबिनेट के अपने फैसले में सीधे बी-1 से रजिस्ट्री और नामांतरण होने के लिए पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है मगर सिर्फ मुंगेली जिले में पटवारी के नजरी नक्शा बनवाने और मोटी रकम की भेंट चढ़ाए बिना नजरी नक्शा के रजिस्ट्रियां असंभव रखी गई है। इस मामले में तहसीलदार से लेकर कलेक्टर को हर घंटे अवगत कराए जाने के बावजूद विष्णु के सुशासन में लिए निर्णय की धज्जियां उड़ाने कोई कसर नहीं बाकी रखी जा रही है।