गरियाबंद: रेशम, धान और उम्मीदों से बुनी राखियाँ , मैनपुर की महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर

गरियाबंद। मैनपुर विकासखंड के अमलीपदर संकुल की स्व-सहायता समूह की महिलाएं रक्षाबंधन पर्व को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। समूह की ये महिलाएं रेशम के धागे, धान, चावल, मूंग, मोती और अन्य सजावटी सामग्रियों से हस्तनिर्मित, पर्यावरण के अनुकूल राखियों का निर्माण कर रही हैं।

इन राखियों में केवल सजावट ही नहीं, बल्कि संस्कृति, सृजनशीलता और आत्मविश्वास भी बुना हुआ है। यह कार्य न केवल पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित कर रहा है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रहा है।

रक्षाबंधन के अवसर पर इन राखियों की मांग स्थानीय बाजारों में तेज़ी से बढ़ी है। खास बात यह है कि इन राखियों की बिक्री भी स्वयं समूह की महिलाएं ही कर रही हैं, जिससे उन्हें सीधी आमदनी हो रही है।

यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण का एक सुंदर उदाहरण बन चुकी है, जो अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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