कलेक्टर ने बुला ली थी बैठक, हाई कोर्ट से मिली राहत
बिलासपुर/मुंगेली। लोरमी नगर पंचायत अध्यक्ष अंकिता रवि शुक्ला के खिलाफ कलेक्टर की ओर से जारी अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इस आदेश से नगर पंचायत के भाजपा और विरोधी पार्षदों को झटका लगा है। पार्षदों की शिकायत पर कलेक्टर ने अध्यक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बिना ही बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुलाई थी।
लोरमी नगर पंचायत में छत्तीसगढ़ में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की टिकट से अंकिता रवि शुक्ला चुनाव जीती थीं। इसके बाद उन्हें सर्वसम्मति से नगर पंचायत अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन, पिछले कुछ महीनों से यहां उठापटक चल रहा था। कांग्रेस के पार्षदों के समर्थन से अध्यक्ष बनीं अंकिता की कुर्सी भी खिसकने वाली थी। क्योंकि उनकी पार्टी के चार, जबकि कांग्रेस के 6 और भाजपा के 5 पार्षद हैं। ऐसे में नाराज पार्षदों ने उनके कामकाज को लेकर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर राहुल देव से शिकायत कर दी थी। उन्होंने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुलाने की मांग की थी।
कलेक्टर ने जांच के बिना बुलाया अविश्वास प्रस्ताव
कलेक्टर राहुल देव ने पार्षदों की शिकायतों पर बिना जांच और नगर पंचायत अध्यक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बगैर ही 24 अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव के लिए बैठक बुलाने का आदेश जारी कर दिया। कलेक्टर के इस आदेश को चुनौती देते हुए अंकिता रवि शुक्ला ने अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसमें बताया गया कि अगर याचिकाकर्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत है, तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन, सिर्फ राजनीतिक षडयंत्र के तहत आरोप लगाकर अविश्वास प्रस्ताव बुलाने के लिए बिना तथ्यों के आरोप लगाने पर कलेक्टर को तथ्यों की जांच करना चाहिए। लेकिन, कलेक्टर ने पार्षदों की शिकायतों पर सीधे अविश्वास प्रस्ताव की बैठक बुलाना गलत है।
हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत, चार सप्ताह बाद होगी सुनवाई
याचिकाकर्ता नगर पंचायत अध्यक्ष के वकील ने इस पूरे मामले को राजनीतिक षडयंत्र बताते हुए अंतरिम राहत देने की मांग की थी। साथ ही कलेक्टर के आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया था। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल ने अंतरिम राहत देते हुए कलेक्टर के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही कलेक्टर सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।