मुंगेली में मार्च के महीने में उप पंजीयक नदारद…रजिस्ट्रियां हो रही प्रभावित

मुंगेली। 2012 में जन्मे इस मुंगेली जिले में एक संयोग यह भी रहा जब लगभग हर विभाग की शीर्ष अधिकारियों का नेतृत्व महिलाओं के जिम्मे बड़ी जिम्मेदारी से रहा मगर आज मुंगेली जिले का दुर्भाग्य ही कहा जाए जिला पंचायत या कहे पंजीयक दफ्तरों में महिला अधिकारी,कर्मचारी की पदस्थापना से पूरे विभाग का काम तो प्रभावित हो ही रहा है साथ ही जनप्रतिनिधियों,अन्य अधिकारियों के मन मस्तिष्क में कभी भी उलझने अथवा आरोप,आक्षेप लगने का भय सता रहा है।

अभी हम बात कर रहे हैं मुंगेली पंजीयक दफ्तर की,जहां महिला उप पंजीयक लक्ष्मी पांडेय पदस्थ है जिनकी उपस्थिति ट्रैक रिकॉर्ड के अनुसार मुख्यालय से बाहर से आने के कारण दोपहर 12 से 1 बजे हो पाती है। समझा यह भी जाता है कि जिले में दारू की आमदनी के बाद सरकार को सबसे बड़ा राजस्व देने वाला विभाग पंजीयक दफ्तर माना जाता है मगर मार्च के महीने में मुंगेली जिले से औसतन पिछले वर्ष के लाभांश की अपेक्षा इस वर्ष फरवरी,मार्च का राजस्व आधा भी नहीं हुआ है और उप पंजीयक लक्ष्मी पांडेय के आधे दिन बाद मौजूदगी अथवा नदारद रहने के कारण रजिस्ट्रियां ठप्प हो रही है जिससे प्रतिदिन लाखों,करोड़ो राजस्व का अनुमान है।

बावजूद चर्चा यह भी है कि महिला नेतृत्व के कारण इस पंजीयक दफ्तर में नियमित जांच अथवा निरीक्षण की प्रशासनिक टीम नहीं कर पा रही है।

आज 5 मार्च के दोपहर 1 बजे के पंजीयक दफ्तर के गुप्त सूत्रों से मिल रही जानकारी अनुसार उप पंजीयक लक्ष्मी पांडेय आज नदारद है जहां ऑपरेटर अथवा चपरासीनुमा लोग मौजूद है। मार्च के महीने में रजिस्ट्री ऑफिस का यह आलम और विधानसभा सत्र भले अभी अवकाश हो मगर इतने गंभीर समय में भी मुंगेली पंजीयक कार्यालय में अधिकारी अलमस्त और राजस्व क्षति की परवाह किए बगैर ऑपरेटर,चपरासी के भरोसे दफ्तर छोड़ रहे हो तब विष्णु के सुशासन की परिकल्पना इस मुंगेली पंजीयक दफ्तर में कितनी ईमानदारी से निभाई जा रही है यह आंकलन सभी जिम्मेदार लोग स्वाभाविक रूप से समझ सकते हैं।


सूत्र यह भी बता रहे हैं कि भयंकर जनता के दबाव में पंजीयक दफ्तर में रजिस्ट्री की सारी औपचारिकता बिना उप पंजीयक के चपरासीनुमा लोग करने की कोशिश में लगे हुए हैं बाद में उप पंजीयक की जब भी उपस्थिति होगी हस्ताक्षर करने की औपचारिकता निभा ली जाएगी उस दरमियान यदि रजिस्ट्रियां कोई गलत हुई तो उसका खामियाजा पक्षकार भुगते मगर आज रजिस्ट्री दफ्तर का यही हाल है। ऐसे में मंत्री ओपी चौधरी की बनाई रजिस्ट्री पॉलिसी कितनी कामगार है अथवा नहीं है यह दो तीन महीनों के मुंगेली पंजीयक दफ्तर के संचालन की समीक्षा कर अंदाजा लगाया जा सकता है।

हर जगह सतर्कता प्रकोष्ठ से निगरानी मगर मुंगेली जिले में बेअसर….

मालूम हो वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पुरे राज्य के सभी पंजीयक कार्यालय सुव्यवस्थित संचालन और निगरानी के लिए सतर्कता प्रकोष्ठ का गठन किया गया है मगर मुंगेली जिले में यह प्रकोष्ठ बेअसर है । अन्य जिलों में सक्रिय है सतर्कता प्रकोष्ठ लगातार निगरानी की जा रही है। राज्य में स्थित 102 पंजीयन कार्यालयों में पंजीबद्ध होने वाले दस्तावेजों में कर अवपंचन की रोकथाम और सतत् निगरानी के लिए महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक मुख्यालय में विभागीय सतर्कता प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। पंजीयन विभाग द्वारा अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय से संबंधित दस्तावेजों का पंजीयन से अंतिम वित्तीय वर्ष में विभाग ने लगभग 2505.98 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। मगर मुंगेली पंजीयक दफ्तर में चरमराई व्यवस्था से राज्य के राजस्व में यदि कोई कमी भी होती है तो अधिकारी बेपरवाह नजर आ रहे हैं।

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