सचिन पायलट के मुंगेली सभा के लिए प्रभारियों की नियुक्ति में पूर्व जिला अध्यक्षों सहित अन्य नेताओं को कर दिया गया किनारे…

“भूपेश सरकार में मंडल आयोग में रहे लगभग आधा दर्जन नेता,पूर्व जिला अध्यक्षों,पूर्व नगर पालिका अध्यक्षों को लगाया गया साइड”

रायपुर/मुंगेली। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी एक बार फिर अपना खोया ताज पाने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी मुहिम ‘वोट चोर–गद्दी छोड़‘ कार्यक्रम अंतर्गत प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट की उपस्थिति में आगामी 17 सितंबर मुंगेली में बड़ी सभा का आयोजन है मगर इस सभा के पहले ही ब्लॉक स्तर की बैठकों में सीनियर/प्रभारी नेताओं के समक्ष जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों द्वारा जिला कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम वर्मा के विरुद्ध अपनी नाराजगी जाहिर कर इस्तीफे देने की बात रखी गई ये डिंडोरी व जरहागांव की बैठकों में हुआ।जिसमें सभी आक्रोशित लोगों ने गुटबाजी और आपसी झगड़ों पर खुलकर अपनी बात रखी। उसके ठीक बाद दी शाम बड़े सभा के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा मुंगेली जिले के आगामी वोट चोर गद्दी छोड़ कार्यक्रम के लिए संयोजक/प्रभारी अन्य जवाबदारियों के लिए नियुक्ति के बाद भयंकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस नियुक्ति में चर्चा यह भी हो रही है कि वर्तमान में जो जिले में कर्ताधर्ता बनते रहे है या पदाधिकारी है उन्हीं के अनुसार सूची जिले स्तर पर ही बनाकर सिर्फ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लेटर हेड व प्रभारी महामंत्री का हस्ताक्षर ले लिया गया हो।

अधिकांश भूपेश समर्थक लगाए गए किनारे…

प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा की गई कार्यक्रम के लिए नियुक्ति में मुंगेली जिले के प्रथम जिला अध्यक्ष के अलावा अन्य सभी पूर्व जिला अध्यक्षों को किनारे कर दिया गया जिसमें दुर्गा बघेल,श्याम जायसवाल,आत्मा सिंह क्षत्रिय,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष द्वय अनिल सोनी, श्रीमती सावित्री सोनी अन्य शामिल है।इसके अलावा मुंगेली जिले में एक मात्र कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मीकांत भास्कर है जिसे भी जवाबदारी से अलग रखा गया है। इसके अलावा भूपेश सरकार में लगभग जिले के आधा दर्जन नेता मंडल,आयोग में रहे उन सभी को किनारे कर जिम्मेदारी दी गई है। अब देखने लायक बात यह भी होगी कि इतने बड़े सभा और राष्ट्रीय स्तर के नेता,छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट के मौजूदगी में होने वाले सभा के लिए जो कांग्रेस पदाधिकारियों, जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में विरोध अथवा आक्रोश की स्थिति बन रही है उसे कैसे रोक कार्यक्रम को सफल बनाया जाएगा।

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